
हिमालय में बर्फ कम हो रही है. इसकी वजह से गंगा नदी बेसिन में बर्फ कम हुआ है. यह 17 फीसदी कम है. यह साल 2018 की तुलना में और बदतर हालत में पहुंच गया है. तब 15 फीसदी कमी दर्ज की गई थी. यानी गंगा नदी का जलप्रवाह 17 फीसदी कम हो गया है.
यह रिपोर्ट जारी की है नेपाल स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने. हिमालय का बर्फ पहाड़ी और मैदानी इलाकों में रहने वाले 24 करोड़ लोगों के लिए प्रमुख जलस्रोत है. हिंदूकुश के पहाड़ों पर सामान्य से कम बर्फबारी हुई है.
यह भी पढ़ें: भारत के क्लाइमेट को लेकर सबसे बड़ी चेतावनी... 3 डिग्री तापमान बढ़ा तो सूख जाएगा 90% हिमालय
हिंदूकुश हिमालय (HKH) में 23 फीसदी बर्फ पिघलती है, तो 12 प्रमुख नदी बेसिन में पानी बहता है. लेकिन इसके अलावा अलग-अलग नदियों में जलबहाव बदल जाता है. जैसे- हिंदूकुश हिमालय से पिघलने वाले बर्फ अमु दारया नदी में 74 फीसदी बहाव देता है. हेलमंड के बहाव में 77 फीसदी और सिंधु नदी में 40% बहाव देता है.
गंगा में पानी का कम, मतलब करोड़ों की जिंदगी तबाह
गंगा नदी बेसिन... पिछले 22 वर्षों में गंगा नदी के जलप्रवाह में काफी बदलाव आया है. 2024 से पहले साल 2018 में सबसे कम बर्फ इस बेसिन में जमा था. तब यह 15.2 फीसदी था. जबकि 2015 में सबसे ज्यादा बर्फ 25.6 फीसदी था. इस साल बर्फबारी कम होने की वजह से ये कम होकर 17 फीसदी हो गया है.
आइए जानते हैं अन्य नदियों कितनी कम बर्फबारी?
अमु दारया नदी बेसिन... साल 2018 में 17.7 फीसदी बर्फ थी. 2008 में यहां सबसे ज्यादा 32.1 फीसदी बर्फ थी लेकिन इस साल यह घटकर 28.2 फीसदी है, जो कि सामान्य से कम है. इस वजह से इस नदी के बेसिन में पिछले वर्षों की तुलना में कम पानी मिलेगा.
ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन... साल 2021 में सबसे कम बर्फबारी दर्ज की गई थी. यहां पर 15.5 फीसदी कम बर्फबारी हुई थी. अधिकतम का रिकॉर्ड 2019 का है. तब 27.1 फीसदी बर्फबारी थी. लेकिन इस साल यहां सिर्फ 14.6 फीसदी है. जो का सामान्य से काफी कम है.
हेलमंड नदी बेसिन... 2018 से अब तक औसत 41.9 फीसदी बर्फबारी दर्ज की गई है. लेकिन 2020 में अधिकतम 44 फीसदी थी. इस साल यह घटकर 31.8 फीसदी हो गई है. जो कि सामान्य से कम है. यानी इस नदी के बेसिन में भी लोगों को कम पानी मिलने वाला है.
यह भी पढ़ें: जमीन के नीचे की जंग... दो टुकड़ों में बंटकर पाताल की ओर जा रही भारतीय प्लेट, हिमालय में आ सकता है बड़ा भूकंप... स्टडी
सिंधु नदी बेसिन... सबसे कम बर्फबारी 2018 में हुई थी. तब यह औसत से 9.4 फीसदी कम था. 2020 में यह 15.5 फीसदी दर्ज की गई थी. लेकिन इस साल यह सामान्य से 23.3 फीसदी कम है. यानी पाकिस्तान में पानी की भारी किल्लत होने वाली है.
इरावड्डी नदी बेसिन... इस बेसिन में बर्फबारी ऊपर-नीचे होती रहती है. लेकिन 2023 से पहले 22 वर्षों में यह 15 फीसदी के आसपास या उससे नीचे ही रही है. 2023 में यह 19.2 फीसदी थी. 2017 में औसत से 12.5 फीसदी कम था. यह सबसे कम था. इस साल सामान्य से 2.4 फीसदी कम है.
मेकॉन्ग नदी बेसिन... यहां पर पानी का बहाव और बर्फबारी दोनों ही पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है. साल 2021 में औस से 38.4 फीसदी कम था. लेकिन 2019 और 2020 बर्फबारी ने रिकॉर्ड तोड़ डाले. ये क्रमश: 68.8 और 52.5 फीसदी था. इस साल सामान्य से सिर्फ 1.1 फीसदी कम बर्फबारी दर्ज की गई है.
यह भी पढ़ें: Hindu Ksuh Region Snow: हिमालय से क्यों गायब हो गई बर्फ... जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सालवीन नदी बेसिन... मेकॉन्ग की तरह यहां पर सबसे कम बर्फबारी 2021 में दर्ज की गई. सामान्य से 28 फीसदी कम. 20219 और 2020 में यहां पर 30.6 और 35 फीसदी बर्फबारी हुई. इस साल यहां पर सामान्य से 2.4 फीसदी कम बर्फबारी हुई है.
तारीम नदी बेसिन... यहां पर 2003 और 2006 में सबसे ज्यादा बर्फबारी 26.6 और 28.5 फीसदी हुई थी. इस साल बर्फबारी कम हुई है. इस साल 27.8 फीसदी बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है.
क्या है पानी की कमी की असली वजह?
वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि बर्फ के पिघलने से इस क्षेत्र की 12 प्रमुख नदी घाटियों को कुल जल प्रवाह का लगभग एक चौथाई हिस्सा हासिल होता है. यह शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और लोगों के लिए एक चेतावनी है.
बर्फ के कम जमाव और बर्फ के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण पानी की कमी का खतरा बढ़ गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा हो रही है. मौसम के पैटर्न में बदलाव हो रहा है. इस साल हिंदूकुश और हिमालय क्षेत्र में बर्फ का स्तर सामान्य से लगभग पांचवां हिस्सा नीचे चला गया है.