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क्या खासियत होती है कि कोई भैंसा 23 करोड़ का हो जाता है... क्या कहता है विज्ञान?

हरियाणा के सिरसा में 23 करोड़ रुपए का भैंसा चर्चा का विषय बना हुआ है. आखिर ऐसा क्या है इन भैंसों में जो इतनी ज्यादा कीमत में बिकते हैं. इस भैंस की प्रजाति, सुपीरियर जेनेटिक्स, इसकी दूध देने की क्षमता, इसकी ब्रीडिंग क्षमता, बीमारियों से लड़ने की ताकत. कोई एक जीव कैसे अपनी ही प्रजाति के जीवों से बेहतर हो जाता है.

मुर्रा भैंसों की डिमांड क्यों रहती है हमेशा, क्यों ये इतने महंगे दामों पर बिकते हैं. जानिए साइंटिफिक वजह. (फोटोः गेटी) मुर्रा भैंसों की डिमांड क्यों रहती है हमेशा, क्यों ये इतने महंगे दामों पर बिकते हैं. जानिए साइंटिफिक वजह. (फोटोः गेटी)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 1:47 PM IST

सिरसा के पलविंदर सिंह का 'अनमोल' भैंसा डिमांड में है. 23 करोड़ रुपए तक बोली लगी है. लेकिन पलविंदर सिंह उसे बेंचने को तैयार नहीं. यहां बात सिर्फ एक भैंस की नहीं है. किसी भी प्रजाति के जीवों में जब कोई एक जीव या उसकी कोई उप-प्रजाति बेहतर होती है, तो उसकी डिमांड ज्यादा होती है. ऐसा ही मुर्रा भैंसों के साथ है.

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आमतौर पर मुर्रा भैंसों की कीमत 50 हजार से 1 लाख तक होती है. लेकिन अनमोल की कीमत जो लगाई गई है, वो बेतहाशा अधिक है. इसका मतलब ये है कि इस भैंस में कुछ तो ऐसा खास होगा. आइए समझते हैं कि इस बारे में साइंस क्या कहता है? 

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क्यों डिमांड में रहते हैं मुर्रा भैंस या भैंसे? 

बेहतर डेयरी... मुर्रा भैंस 20 से 25 लीटर दूध प्रतिदिन देती है. जिसमें साढ़े छह से सात फीसदी तक फैट होता है. यानी ज्यादा मलाई. ज्यादा मलाई तो ज्यादा घी. इसके अलावा मुर्रा भैंस का लैक्टेशन पीरियड यानी दूध देने का कुल दिन बाकी भैंसों से ज्यादा होता है. ये 300 से 320 दिन दूध देती हैं. दूध की क्वालिटी भी अच्छी होती है. इसमें ज्यादा प्रोटीन, कैल्सियम और फॉस्फोरस पाया जाता है. 

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उम्दा स्तर की ब्रीडिंग... मुर्रा भैंसों का जेनेटिक मेकअप बहुत ज्यादा मजबूत होता है. जिसकी वजह से इनके बच्चे भी स्वस्थ और मजबूत पैदा होते हैं. अच्छे जेनेटिक मेकअप की वजह से इनका फर्टिलिटी रेट भी ज्यादा होता है. इनका काल्विंग इंटरवल 400 से 450 दिन होता है. ये आम भैंसों की तुलना में बीमारियों के प्रति ज्यादा मजबूत इम्यूनिटी रखते हैं. 

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ये तो हो गई साइंटिफिक वजह, अब जानिए अन्य कारण

आर्थिक फायदा... जब ज्यादा दूध मिलेगा तो उसके अन्य उत्पाद भी ज्यादा बनेंगे. इससे आर्थिक फायदा ज्यादा होता है. सिर्फ दूध बेंचकर भी काफी पैसा कमाया जा सकता है. इनका मेंटेनेंस कम हैं. भैंसों की अन्य प्रजातियों की तुलना में इनका मेंटेनेंस कम है. वो बात अलग है कि इनके मालिक इनका ख्याल रखने के लिए कैसी-कैसी सुविधाओं का अरेंजमेंट करते हैं. इनका जीवन 15 से 20 साल होता है. जो कि अन्य भैंसों की तुलना में ज्यादा है. 

सरकारी मदद, मार्केट डिमांड और सांस्कृतिक महत्व

मुर्रा भैंसों की फार्मिंग के लिए भारत सरकार से मदद मिलती है. डेयरी प्रोडक्ट्स की डिमांड की वजह से मुर्रा भैंसों के दूध की मांग ज्यादा है. भारत, पाकिस्तान, चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, मिडिल-ईस्ट में इन भैसों की काफी मांग है. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में इन भैंसों को रखना सांस्कृतिक और सामाजिक तौर पर रसूख का मामला माना जाता है. ये कहते हैं कि जिसके  यहां मुर्रा है, यानी उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत है. 

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कहां-कहां मिलती है इस भैंस की प्रजाति? 

भारत, अजरबैजान, ब्राजील, कोलंबिया, चीन, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, नेपाल, फिलिपींस, श्रीलंका, वियतनाम और वेनेजुएला. आमतौर पर एक नर मुर्रा भैंस 750 किलोग्राम और मादा 650 किलोग्राम की होती है. ऊंचाई 4.7 से 4.9 फीट तक होती है. रंग काला ही होता है. 

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