
नेपाल से लेकर भारत के हिंदूकुश हिमालय तक ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ की मात्रा न के बराबर है. वजह है जलावयु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग. अब तक कुछ हिमालयी राज्यों में थोड़ी बहुत बर्फबारी हुई है. कुछ जगहों पर एकदम नहीं. जबकि मौसम विज्ञानी कहते हैं कि अब उम्मीद जनवरी महीने के आखिरी दिनों से है. अब तक तो निराशा ही मिली है.
साल 2024 में अब तक पूरी सर्दी सूखी ही रही है. बारिश हो नहीं रही है. पिछले साल नवंबर में पहाड़ी इलाकों में बारिश में 80 फीसदी की कमी थी. दिसंबर में 79 फीसदी की कमी थी. इस साल जनवरी में अब तक तो 100 फीसदी की कमी है. बारिश हो ही नहीं रही है.
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श्रीनगर स्थित मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख मुख्तार अहमद ने कहा कि अगले 7-8 दिनों में बर्फबारी की उम्मीद है. पिछले कुछ वर्षों में सर्दियों के दिनों में कमी आई है. पहले जम्मू और कश्मीर में अक्टूबर से मार्च तक सर्दी होती थी. अब यह घटकर दिसंबर से जनवरी तक ही सीमित रह गई है. इसकी वजह क्लाइमेट चेंज और बढ़ता तापमान है. बारिश का पैटर्न भी बदला है. जिसकी वजह से बर्फ बनती थी. अब बारिश कम होती है इसलिए बर्फ भी कम जमती है.
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ये स्थिति सिर्फ कश्मीर में ही नहीं है. बल्कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी यही हाल है. उत्तराखंड और हिमाचल के स्की रिजॉर्ट्स में बर्फ है ही नहीं. इसलिए स्की कॉम्पीटिशन नहीं हो रहे हैं. अन्नपूर्णा रेंज के ऊपरी हिस्से में भी बहुत कम बर्फ है. काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रो. रिजन भख्त ने कहा कि इस साल नेपाल में बहुत कम बारिश हुई है. खासतौर से सर्दियों के मौसम में. नेपाल के हिमालय में भी बर्फबारी कम हुई है. पिछले दो दिनों से कहीं-कहीं बारिश-बर्फबारी हो रही है.
हिमालय में बारिश में देरी और कम बर्फबारी से इस इलाके का हाइड्रो इकोलॉजी बिगड़ेगा. जिसका असर फसलों पर पड़ेगा. बारिश का न होना और कम बर्फबारी सीधे तौर पर यह बताती है कि हिमालय में तेजी से मौसम बदल रहा है. तापमान बढ़ रहा है.
स्काईमेट वेदर के वाइस प्रेसिडेंट महेश पालावत ने कहा कि हिमालय का इलाका तापमान और बारिश को लेकर बेहद संवेदनशील है. उत्तरी भारत के पहाड़ी इलाकों में बहुत कम बर्फबारी हुई है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की तीव्रता भी कम है. जिसकी वजह से दिसंबर और जनवरी में बारिश और बर्फबारी कम हुई है. पिछले साल भी बर्फबारी देरी से हुई थी. दिसंबर 2022 के अंत में फिर जनवरी 2023 के अंत में.
ICIMOD की स्टडी के मुताबिक 2010 के दशक में हिमालय के ग्लेशियर 65 फीसदी से ज्यादा दर से पिघले है. वो भी पिछले दशकों की तुलना में. पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो नेपाल गए थे. वहां उन्हें पता चला कि नेपाल ने अपने बर्फ का करीब एक तिहाई हिस्सा खो दिया है. अब उतनी बर्फ नहीं बनती जितनी पहले बनती थी. वो भी सिर्फ 30 सालों के अंदर. हिमालय के इलाकों में पिछले 100 सालों के अंदर तापमान 0.74 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है.