
ऑस्ट्रेलिया में कुछ ऐसे खतरनाक जीव है, जो दिखते तक नहीं. क्योंकि इतने छोटे होते हैं. लेकिन जहर ऐसा कि सांस लेना मुश्किल हो जाए. कुछ तो दिखने में पत्थर जैसे लगेंगे, लेकिन जैसे ही छुआ... लगेगा की जहर की सुनामी शरीर में दौड़ गई हो. इनके डंक और जहर की कहानी बता रहे हैं... ऑस्ट्रेलिया के जेम्स कुक यूनिवर्सिटी के टॉक्सिकोलॉजिस्ट जैमी सीमोर.
जैमी को अब तक ऐसे जहरीले जीवों ने 11 बार काटा है. क्योंकि उनका काम ही यही है. वो इंसानी जीवन को जहर से बचाने के लिए एंटीवेनम तैयार करते हैं. इसके लिए उन्हें कई बार जहरीले समुद्री जीवों का जहर निकालना होता है. जैमी ने बताया कि ऐसी ही एक जहरीली जेलीफिश है इरुकांडजी (Irukandji Jellyfish).
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ये जेलीफिश सरसों के दाने के बराबर होती हैं. या उससे थोड़ी बड़ी. क्वींसलैंड में मौजूद जैमी की यूनिवर्सिटी के लैब में इन्हें पाला गया है. ताकि इनका जहर निकाला जा सके. इससे काफी ज्यादा मात्रा में एंटीवेनम बनाया जाता है. दूसरे टैंक में दुनिया की सबसे जहरीली मछली स्टोनफिश रखी रहती है.
स्टोनफिश की हड्डी चुभी तो समझो मौत से कोई नहीं बचा सकता
स्टोनफिश की रीढ़ की हड्डी या शरीर किसी भी हड्डी चुभती है, तो आपको इतना दर्द होगा कि आप बेहोश हो जाएंगे. घाव काला होता चला जाएगा. अंत में आपकी मौत हो जाएगी. स्टोनफिश का जहर इतना ताकतवर होता है कि उससे इंसान मारा जाए. इसकी वजह से हर साल ऑस्ट्रेलिया में काफी लोग मरते हैं.
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बॉक्स जेलीफिश के जहर से 10 मिनट में इंसान मर जाता है
जैमी सीमोर और उनकी टीम लोगों को बचाने के लिए इन जहरीले समुद्री जीवों का जहर निकालते हैं. उससे एंटी-वेनम बनाने का काम करते हैं. जैमी कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे जानलेवा समुद्री जीवों का महाद्वीप है. बॉक्स जेलीफिश का डंक लग जाए तो इंसान दस मिनट में मर जाता है.
2001 से 2017 के बीच हर साल ऑस्ट्रेलिया में 32 लोगों की मौत इन जीवों की वजह से हुई है. इसके अलावा घोड़े और गायों की मौत अलग हैं. 1883 से अब तक दो ही रिकॉर्ड हैं, जिसमें इरुकांडजी जेलीफिश की वजह से किसी की मौत हुई है. बॉक्स जेलीफिश के डंक से 70 लोगों की मौत हो चुकी है.
इरुकांडजी जेलीफिश के जहर का कोई एंटी-वेनम भी नहीं
हैरानी इस बात की है कि इरुकांडजी जेलीफिश के जहर का कोई एंटी-वेनम नहीं है. अगर इसका डंक किसी को लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए. बचने का चांस बढ़ जाता है. जैमी कहते हैं कि स्टोनफिश से जहर निकालना बेहद जटिल काम है. रिस्की भी है. जैमी को जिंदा स्टोनफिश के जहर वाली ग्रंथि में सीरिंज डालनी होती है. फिश को पकड़ने के लिए मोटे तौलिये की जरूरत होती है.
इसके बाद जहर को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घोड़े के शरीर में डाला जाता है. यह प्रोसेस छह महीने चलता है. इससे घोड़े के शरीर में प्राकृतिक एंटीबॉडीज बनती हैं. इसके बाद घोड़े का प्लाज्मा निकालकर उससे एंटीबॉडी निकाल ली जाती है. साफ-सुथरा करके इंसानों के लिए एंटी-वेनम बनाया जाता है.