अब चींटियां इसी केमिकल को सूंघकर पहचान लेंगी और किसी बड़ी जांच से पहले ही पता लग सकेगा कि किसी को कैंसर है, या नहीं. यूरोप और दक्षिण एशिया में बहुतायत में मिलने वाली फॉर्मिका फ्यूस्का चींटियों के इस्तेमाल से हुए अध्ययन को अहम बायोमार्कर माना जा रहा है, जो बिना किसी खर्च और शरीर में जख्म के कैंसर की काफी हद तक पहचान कर सकी.