डेटा लॉगर ट्रेन के ब्लैक बॉक्स की तरह होता है. जैसे ही सिग्नल सिस्टम का बटन दबता है, वैसे ही ये सारी चीजें रिकॉर्ड करने लगता है. अब डेटा लॉगर की मदद से ही हादसे की जांच करने में मदद मिलेगी.