
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को यू हीं 'क्रिकेट का भगवान' नहीं कहा जाता है. इसकी एक झलक साल 1998 में शारजाह के मैदान पर देखने को मिली थी. 24 साल पहले आज ही के दिन (22 अप्रैल) सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 131 गेंदों पर 143 रनों की तूफानी पारी खेली थी. इस पारी को 'डेजर्ट स्टॉर्म' के नाम से भी जाना जाता है.
दरअसल, जब भारत ऑस्ट्रेलिया के 285 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रहा था, तो उसी समय शारजाह में रेतीला तूफान आ गया और स्कोर को छोटा कर दिया गया. लेकिन, जब तूफान रुका तो मैदान के अंदर 'सचिन तेंदुलकर' नाम का तूफान आया, जिसने पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम को उड़ा दिया.
गांगुली के साथ की थी ओपनिंग
सौरव गांगुली के साथ ओपनिंग करने उतरे सचिन ने मानो मन में कुछ ठान रखा हो. सचिन ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को जिस तरह खेलना शुरू किया उससे उनकी मंशा साफ दिखाई दे रही थी. सचिन ने लगातार शेन वॉर्न, कास्प्रोविच, स्टीव वॉ, टॉम मूडी किसी को नहीं बख्शा और आगे बढ़-बढ़ कर चौके एवं छक्के जड़े. भारत भले यह मैच हार गया था, लेकिन नेट रन-रेट के दम पर उसने फाइनल में जगह बना ली थी.
ऐसा रहा था मुकाबला....
भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच आयोजित कोका कोला कप के उस छठे मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए अपने 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 284 रनों का स्कोर खड़ा किया. माइकल बेवन ने नाबाद 101 रनोंं की पारी खेली थी. वहीं मार्क वॉ ने 81 रनोंं का अहम योगदान दिया था.
जवाब में भारत को 46 ओवरों में 276 रनों का संशोधित लक्ष्य मिला था. भारतीय टीम 5 विकेट पर 46 ओवरों में 250 रन ही बना सकी और मैच को 26 रनों से गंवा दिया. लेकिन भारत को फाइनल के लिए क्वालिफाई करने के लिए 46 ओवरों में 238 रनों की ही जरूरत थी, जो उसने हासिल कर लिया. सचिन ने अपनी पारी में नौ चौके और पांच छक्के लगाए थे.
इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में 24 अप्रैल को सचिन ने अपने 25वें जन्मदिन पर 134 रनों की धुआंधार पारी खेली, जिसकी बदौलत भारत ने कंगारू टीम को छह विकेट से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया था.