
विक्की ओस्तवाल महाराष्ट्र के हिल स्टेशन लोनावाला में शौकिया तौर पर क्रिकेट खेलते थे, लेकिन कोच मोहन जाधव ने उनकी प्रतिभा देखने के बाद उनके पिता से पुणे स्थानांतरित होने का सुझाव दिया, जिसके बाद भारतीय अंडर-19 टीम के इस खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
बाएं हाथ के इस स्पिनर ने वेस्टइंडीज में जारी आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप के पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच विकेट लेकर भारत की जीत की पटकथा लिखी. राष्ट्रीय टीम के लिए यह प्रदर्शन उनके माता-पिता की दुआओं और त्याग का असर है.
वेंगसरकर अकादमी से की शुरुआत
उनके कोच मोहन जाधव ने सोमवार को पीटीआई से कहा,यह लड़का लोनावाला का रहने वाला है. शुरुआत में, वह नौ साल की उम्र में वेंगसरकर अकादमी में क्रिकेट खेलने के लिए मुंबई गया था. फिर जब वह 10 साल का था तब वह थेरगांव में वेंगसरकर अकादमी की शाखा में आया.’
उन्होंने कहा, ‘वहीं से उसका सफर शुरू हुआ. पुणे में स्थानांतरित होने का कारण यह था कि लोनावाला मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. यह महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमएसीए) के अंतर्गत आता है.’
एशिया कप में भी दिखाया था कमाल
इस 19 साल के खिलाड़ी ने भारत की अंडर-19 एशिया कप जीत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्होंने फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ तीन विकेट लिए थे.
जाधव ने कहा, ‘उसके पिता और उसने (ओस्तवाल) तीन से चार साल तक लोकल ट्रेन से यात्रा की. उसके पिता ने स्कूल से उसे जल्दी ले जाने के लिए विशेष अनुमति ली थी और फिर लोनावाला से ट्रेन से चिंचवड़ की यात्रा करते थे. इसमें उन्हें कम से कम डेढ़ घंटा लगता था. कुल मिलाकर वे रोजाना तीन घंटे की यात्रा करते थे.’
जाधव को तब लगा कि अकादमी के पास किसी जगह स्थानांतरित होने से उसकी यात्रा समय बच जाएगा. उन्होंने कहा, ‘हमने परिवार से पुणे के आसपास रहने का अनुरोध किया और वे इसके लिए तैयार हो गए. इससे वह अभ्यास और अधिक ध्यान और समय देने लगा.’