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बस साइंस का ये नियम फॉलो कर लें नीरज चोपड़ा, फिर वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ना असंभव भी नहीं

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST
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पाकिस्तान के अरशद नदीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 90.18 मीटर भाला फेंका. उन्होंने कहा कि वो अब विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी करेंगे. साथ ही टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा को चुनौती भी दे दी. अब नीरज चोपड़ा क्या अरशद के चैलेंज से पार पाएंगे. करारा जवाब दे पाएंगे. विश्व रिकॉर्ड बना पाएंगे. इन सवालों का जवाब सेहत, प्रैक्टिस के साथ-साथ भाला फेंकने के विज्ञान में छिपी है. आज समझते हैं भाला फेंकने का विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए नीरज चोपड़ा को किस तरह के बायोमैकेनिक्स की प्रैक्टिस करनी होगी. (फोटोः एपी)

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दुनिया में भाला फेंकने यानी जैवलिन फेंकने का विश्व रिकॉर्ड चेक गणराज्य के जान ज़ेलेज़नी (Jan ŽELEZNÝ) के नाम है. जान ने 25 मई 1996 को 98.48 मीटर दूर भाला फेंक कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. उससे पहले ये रिकॉर्ड अमेरिका के थॉमस एलन पेट्रानॉफ के नाम था. उन्होंने 1983 में 99.72 मीटर भाला फेंक कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था. लेकिन उन्होंने इसके लिए पुराना जेवलिन (Old Javelin) का इस्तेमाल किया था. खैर वर्तमान रिकॉर्ड तो 98.48 मीटर ही है. खैर अब समझते हैं भाला फेंकने का बायोमैकेनिक्स... ताकि विश्व रिकॉर्ड बनाने का साइंस समझ में आए. (फोटोः एपी)

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पुरुष भाला फेंक प्रतियोगिता में भाले की लंबाई 2.6 से 2.7 मीटर के बीच होती है. इसका वजन 800 ग्राम होता है. जबकि महिलाओं के लिए भाले की वजन 600 ग्राम और लंबाई 2.2 से 2.3 मीटर होती है. किसी भी शारीरिक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ताकत, क्षमता, सहनशक्ति, शारीरिक और मानसिक ऊर्जा की जरूरत तो होती ही है. लेकिन इन सबसे ज्यादा जरूरी है, उस काम को करने की तकनीक यानी उसके पीछे का सटीक विज्ञान. भाले को कैसे फेंका जाए कि वो सबसे ज्यादा दूरी तय करके विश्व रिकॉर्ड बना सके. (फोटोः फ्रीपिक)

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भाला (Javelin) फेंकने के पीछे कुछ खास विज्ञान होता है. आपकी गति, हवा की गति, दिशा, एयरोडायनेमिक्स, फेंकने का एंगल, साथ ही भाला फेंकते समय उसे किस गति पर फेंकना है और कितने एंगल पर इसपर खुद का नियंत्रण. क्योंकि इनमें से एक भी फैक्टर बिगड़ा तो भाला तय स्थान तक नहीं जा पाएगा. तेजी से भाला फेंकने के लिए तीन स्टेप होते हैं. पहला तेजी से दौड़ना और क्रॉसओवर स्टेप. यानी 6 से 10 कदम तेजी से दौड़कर दो तीन कदम क्रॉसओवर स्टेप लेना होता है. (फोटोः गेटी)

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दुनिया के बेहतरीन भाला फेंकने वालों की ग्रिप भी बहुत सही होती है. वो फिनिश ग्रिप पर ही भाले को पकड़ते हैं. उसे पकड़ने का एक तरीका होता है. जिसे कहते हैं V या Claw Grip. इस ग्रिप की वजह से भाला शरीर के नजदीक रहता है, इसे फेंकते समय शरीर से स्थानातंरित की गई ऊर्जा, कोण और दिशा सबसे ज्यादा सटीक मिलती है. (फोटोः फ्रीपिक)

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ये 6 से 10 कदम 5 से 6 मीटर प्रति सेकेंड की दर से दौड़ने की कोशिश करते हैं. यानी 20 KM प्रतिघंटा. जबकि भाला फेंका जाता है 28-20 मीटर प्रति सेकेंड यानी 100 KM प्रतिघंटा की रफ्तार से. ये गति आखिरी के दो क्रॉसओवर स्टेप पर मिलती है. सेकेंड लास्ट क्रॉसओवर स्टेप को इंपल्स स्टेप (Impulse Step) कहते हैं. यह मूवमेंट क्रिकेट के फास्ट बॉलर की तरह होता है. (फोटोः गेटी)

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इसके बाद आखिरी स्टेप होता है डेलिवरी स्टेप (Delivery Step) जिसमें एथलीट अपने रनअप से बनी गति और ताकत का उपयोग करके भाला को फेंकता है. इसे शरीर की सारी ऊर्जा को हाथों में ट्रांसफर करने का प्रयास किया जाता है. ताकि भाला दूर तक जाए. यानी आपके शरीर की ऊर्जा नीचे से ऊपर कंधे तक जाती है, उसके बाद वही ऊर्जा की लहर कुहनियों की तरफ से होते हुए भाले तक भेजी जाती है. यह तब शुरु होता है जब एथलीट अपने पिछले पैर पर रुकता है. अगला पैर और भाला ऊपर की तरफ उठाता है. भाले की नोक आंखों की सीध में होती है. (फोटोः गेटी)

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इसके बाद डेलिवरी और रिकवरी. यानी पहला पैर जमीन पर होता है. शरीर के ऊपरी हिस्से का मूवमेंट हो रहा होता है. एथलीट नीचे झुककर ऊर्जा को संतुलित करके रुकता है. भाला फेंकने के लिए उसका कोण यानी एंगल बहुत जरूरी होता है. मेडल जीतने के लिए जरूरी है कि भाला फेंकते समय उसका सिरा 32 से 36 डिग्री के कोण पर हो. इसमें तीन एंगल्स का ख्याल रखा जाता है. एंगल ऑफ अटैक (Angle Of Attack), एंगल ऑफ एटीट्यूट (Angle of Attitude) और एंगल ऑफ वेलोसिटी वेक्टर (Angle of Velocity Vector). (फोटोः ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट मूवमेंट)

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इसके बाद डेलिवरी और रिकवरी. यानी पहला पैर जमीन पर होता है. शरीर के ऊपरी हिस्से का मूवमेंट हो रहा होता है. एथलीट नीचे झुककर ऊर्जा को संतुलित करके रुकता है. भाला फेंकने के लिए उसका कोण यानी एंगल बहुत जरूरी होता है. मेडल जीतने के लिए जरूरी है कि भाला फेंकते समय उसका सिरा 32 से 36 डिग्री के कोण पर हो. इसमें तीन एंगल्स का ख्याल रखा जाता है. एंगल ऑफ अटैक (Angle Of Attack), एंगल ऑफ एटीट्यूट (Angle of Attitude) और एंगल ऑफ वेलोसिटी वेक्टर (Angle of Velocity Vector). (फोटोः फ्रीपिक)

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इसके बाद एथलीट इस बात का ख्याल रखते हैं कि एंगल ऑफ वेलोसिटी वेक्टर (Angle of Velocity Vector) यानी भाले के उड़ान मार्ग के दौरान भाले के बीच का मास संतुलित रहता है या नहीं. यानी भाला उड़ान के समय हमेशा किसी कोण पर तो नहीं है. उसका केंद्र जीरो डिग्री पर होना चाहिए. (फोटोः फ्रीपिक)  

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