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Bajrang Punia appeal vs NADA: टोक्यो ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट बजरंग पूनिया NADA (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) द्वारा लगाए बैन के खिलाफ अपील करेंगे. पूनिया इसके लिए वह CAS (Court of Arbitration for Sport) की ओर रुख कर सकते हैं. स्विट्जरलैंड के लुसाने में मौजूद CAS में NADA द्वारा लगाए बैन के खिलाफ अपील करने का मन बनाया है. ध्यान रहे CAS वही संस्था है, जहां विनेश फोगाट ने भी सिल्वर मेडल के लिए पेरिस ओलंपिक में डिसक्वालिफाई होने के बाद अपील की थी.
वहीं खुद के ऊपर लगे बैन के खिलाफ पहलवान बजरंग पूनिया ने एक लंबा सोशल मीडिया पोस्ट लिखा था. वहीं एक वीडियो भी शेयर किया. बजरंग ने इस पोस्ट मे लिखा- चार साल का प्रतिबंध मेरे खिलाफ व्यक्तिगत द्वेष और राजनीतिक साजिश का परिणाम है. मेरे खिलाफ यह कार्रवाई उस आंदोलन का बदला लेने के लिए की गई है, जो हमने महिला पहलवानों के समर्थन में चलाया था. उस आंदोलन में हमने अन्याय और शोषण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी.
बजरंग ने अपने पोस्ट में भाजपा सरकार और फेडरेशन पर हमला बोला. उन्होंने कहा मुझे फंसाने और मेरे करियर को खत्म करने के लिए यह चाल चली है. यह फैसला निष्पक्ष नहीं है, बल्कि मेरे और मेरे जैसे अन्य खिलाड़ियों को चुप कराने की कोशिश है.
एक्सपायर किट से करना चाहते थे टेस्ट
बजरंग ने पोस्ट में आगे लिखा- मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैंने कभी भी डोपिंग टेस्ट कराने से मना नहीं किया. NADA की टीम जब मेरे पास टेस्ट के लिए आई थी, तो उनके पास जो डोप किट थी, वह एक्सपायर हो चुकी थी. यह एक गंभीर लापरवाही थी, और मैंने केवल यह आग्रह किया कि एक वैध और मान्य किट के साथ परीक्षण किया जाए. यह मेरे स्वास्थ्य और करियर की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक था. लेकिन, इसे जानबूझकर मेरे खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया.
NADA की इस हरकत ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें निष्पक्षता से कोई लेना-देना नहीं है. इस तरह के तमाम संस्थान सरकार के इशारे पर चल रहें है. इस प्रतिबंध के पीछे का असली मकसद मुझे चुप कराना और गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने से रोकना है.
मैं यह स्पष्ट कर दूं कि चाहे मुझे जिंदगीभर के लिए निलंबित कर दिया जाए, लेकिन मैं अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाना बंद नहीं करूंगा. यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं, हर उस खिलाड़ी की है जिसे सिस्टम ने चुप कराने की कोशिश की है. मैं इस फैसले के खिलाफ अपील करूंगा और अपने हक की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ता रहूंगा.
बजरंग के वकील ने क्या कहा?
'हिन्दुस्तान टाइम्स' में छपी रिपोर्ट के अनुसार बजरंग एंटी-डोपिंग अपील पैनल के समक्ष भी अपील कर सकते हैं. उनके वकील विदुषपत सिंघानिया ने कहा कि वे सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा- बजरंग ने इच्छा जताई है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करना चाहते हैं. हम देखेंगे कि हम CAS या ADAP ( Anti-Doping Appeal Panel ) के पास जाते हैं या नहीं.
बजरंग ने कहा-मेरा नमूना 6 बार लिया गया
बजरंग ने इस रिपोर्ट में कहा- वे मुझे निशाना बना रहे हैं. यह विरोध प्रदर्शनों के बाद से हो रहा है. उन्होंने छह बार मेरा नमूना एकत्र किया है, मैं भले ही कंपटीशन नहीं लड़ रहा था, लेकिन मैंने कभी इनकार नहीं किया. क्या यह मेरी गलती है कि मैं हमारी महिला पहलवानों के साथ खड़ा था? जब वे 13 दिसंबर को एक्सपायर हो चुकी किट के साथ मेरा नमूना लेने आए, तो मैंने अपनी आवाज उठाई क्योंकि मुझे सिस्टम पर भरोसा नहीं रहा.
बजरंग ने एक्सपायर हो चुकी किट का वीडियो बनाकर 15 दिसंबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. बजरंग ने कहा- मैंने दिसंबर से मार्च तक NADA को तीन-चार मेल भी लिखे, जिसमें पूछा गया कि इस मामले में उसने क्या कार्रवाई की है, आज तक मुझे कोई जवाब नहीं मिला है.
26 नवंबर को लगाया गया बजरंग पर बैन
NADA ने 26 नवंबर को बजरंग पूनिया को नेशनल टीम के लिए सेलेक्शन ट्रायल के दौरान 10 मार्च को डोप परीक्षण के लिए अपना नमूना देने से इनकार करने के लिए चार साल के लिए बैन कर दिया है. इससे पूर्व NADA ने टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता पहलवान को इस अपराध के लिए सबसे पहले 23 अप्रैल को बैन किया था, जिसके बाद कुश्ती की वर्ल्ड लेवल की संस्था UWW (United World Wrestling) ने भी बैन कर दिया था.
बजरंग ने इस बैन के खिलाफ अपील की थी और NADA के अनुशासनात्मक डोपिंग पैनल (ADDP) ने 31 मई को नाडा द्वारा आरोप का नोटिस जारी किए जाने तक इसे रद्द कर दिया था. नाडा ने इसके बाद 23 जून को पहलवान को नोटिस दिया था.
ध्यान रहे बजरंग पूनिया साथी पहलवान विनेश फोगाट के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे, जहां उनको अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का प्रभार दिया गया था. उन्होंने 11 जुलाई को लिखित रूप से इस आरोप को चुनौती दी थी, जिसके बाद 20 सितंबर और 4 अक्टूबर को सुनवाई हुई थी.
बजरंग पूनिया को लेकर ADDP ने अपने आदेश में कहा- पैनल का मानना है कि एथलीट अनुच्छेद 10.3.1 के तहत प्रतिबंधों के लिए उत्तरदायी है और 4 साल की अवधि के लिए अयोग्य घोषित किए जाते हैं. इस बैन का मतलब है कि बजरंग प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी नहीं कर पाएंगे और अगर वह चाहें तो विदेश में कोचिंग की नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे. पैनल ने बताया कि बजरंग पर 4 साल का बैन 23.04.2024 से लागू होगा.
जब विनेश ने लिया था CAS का सहारा
पेरिस ओलंपिक 2024 में महज 100 ग्राम वजन ज्यादा होने के कारण विनेश फोगाट को डिस्क्वालिफाई कर दिया गया था. ओलंपिक 2024 में फोगाट ने 50 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल में एंट्री कर सिल्वर मेडल पक्का किया था. मगर गोल्ड मेडल मैच वाले दिन सुबह विनेश को डिसक्वालिफाई कर दिया गया, क्योंकि उनका वजन 100 ग्राम ज्यादा था. विनेश ने CAS (Court of Arbitration for Sports) में अपील कर सिल्वर मेडल की मांग की. इसके लिए उन्होंने कई दलीलें दीं, इनमें 5 काफी मजबूत थीं. उसके बावजूद उनकी अपील खारिज कर दी गई.
कौन हैं पहलवान बजरंग पूनिया?
बजरंग पूनिया ने घुटने की चोट से जूझने के बावजूद टोक्यो में अपने पहले ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था. हरियाणा के झज्जर में साधारण से परिवार में जन्मे बजरंग के पिता बलवान सिंह खुद एक पहलवान थे. युवावस्था में बजरंग अक्सर पहलवानों की कुश्ती देखने के लिए स्कूल से भाग जाया करते थे.
बजरंग पुनिया ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें नहीं मुझे पता चला कि कुश्ती कब उनके जीवन का हिस्सा बन गया. इस भारतीय पहलवान ने स्थानीय अखाड़े में 14 साल की उम्र में ही प्रशिक्षण शुरू कर दिया और जल्द ही उन्हें साथी ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त से मिलवाया गया. योगेश्वर दत्त की देख-रेख में बजरंग ने कुश्ती से जुड़ी कई बारीकियां सीखीं जो आगे चलकर उनके लिए काफी मददगार साबित हुईं. बजरंग पुनिया पहली बार 2013 में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप और विश्व चैंपियनशिप में पुरुषों के फ्रीस्टाइल 60 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर सुर्खियों में आए थे.