
Wrestling Federation Of India vs United World Wrestling: इंटरनेशनल लेवल पर कुश्ती की गवर्निंग बॉडी UWW (United World Wrestling) ने धमकी दी है कि अगर भारतीय कुश्ती महासंघ (Wrestling Federation Of India : WFI) में राजनीतिक हस्तक्षेप जल्द खत्म नहीं हुआ तो वह भारत को सस्पेंड कर दिया जाएगा.
ऐसे में यदि UWW भारत को राजनीतिक हस्तक्षेप के लिए निलंबित करता है तो देश के पहलवानों को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलेगी. जो भारत के उन कई रेसलर्स के लिए झटका होगा, जो इस खेल में अपना फ्यूचर देख रहे हैं और ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ और वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत को मेडल जिताने का सपना देख रहे हैं.
UWW प्रेसिडेंट नेनाद लालोविक ने स्पष्ट रूप से कहा कि WFI की स्वायत्तता बरकरार रखी जानी चाहिए. खेल मंत्रालय ने WFI को निलंबित कर दिया था, इससे पहले महासंघ ने दिसंबर 2023 में चुनाव करवाए थे. मंत्रालय के निलंबन को आधार बनाते हुए पहलवान सत्यव्रत कादियान ने दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर कर WFI के भारतीय टीमों के सेलेक्शन के अधिकार पर सवाल उठाया था.
इसी वजह से भारतीय टीमें वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से लगभग चूक गई थीं. मंत्रालय ने टीम को मंजूरी देने के बाद कहा था कि वह निलंबन की समीक्षा करेगा. यहां तक कि अदालत ने मंत्रालय से निलंबन पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था. अदालत ने तदर्थ पैनल (एडहॉक पैनल) को भी बहाल कर दिया था, लेकिन IOA (Indian Olympic Association) ने यह कहते हुए आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया कि इसकी जरूरत नहीं है.
यहां तक कि सरकार ने भी महासंघ के अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में कुछ बैठकों में भाग लेने के लिए WFI अध्यक्ष संजय सिंह को आमंत्रित किया था. गुरुवार को UWW प्रेसिडेंट नेनाद लालोविक ने संजय सिंह को एक पत्र लिखा कि वह WFI को भारत में कुश्ती के खेल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रतिनिधित्व से संबंधित सभी मामलों में हमारे लिए एकमात्र मध्यस्थ के रूप में स्वीकार करते हैं.
उन्होंने आगे कहा UWW हमारे सदस्य महासंघों के आंतरिक मामलों में सार्वजनिक और राजनीतिक अधिकारियों द्वारा किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करता है, सिवाय राष्ट्रीय महासंघों को सार्वजनिक अनुदान के उपयोग के नियंत्रण से संबंधित मामलों को छोड़कर...
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, UWW प्रेसिडेंट नेनाद लालोविक ने पत्र में लिखा- स्वायत्तता और स्वतंत्रता का यह सिद्धांत UWW संविधान के अनुच्छेद 6.3 और ओलंपिक चार्टर द्वारा प्रदान किया गया है, और हमारे सभी सदस्य महासंघों द्वारा इसका सख्ती से पालन किया जाएगा.
पिछले पत्र का भी उल्लेख किया गया...
इस रिपोर्ट में कहा गया कि UWW ने इस बारे में भारत को पिछले पत्राचार का भी उल्लेख किया. निलंबन (सस्पेंड)पर विचार किया जाएगा यदि आपके महासंघ की स्वायत्तता पूरी तरह से और लंबे समय तक बरकरार नहीं रखी जाती है. WFI के एक सूत्र ने कहा- निलंबन के कारण नेशनल कैम्प पहले से ही स्थगित हैं. निलंबन जारी रखने का कोई आधार नहीं है. यदि मंत्रालय निलंबन समाप्त नहीं करता है और परिणामस्वरूप UWW द्वारा WFI पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, तो यह खेल और देश के पहलवानों के लिए बहुत बड़ा नुकसान होगा_