
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने मनप्रीत सिंह की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया है. गुरुवार को खेले गए ब्रॉन्ज मेडल मैच में भारत ने जर्मनी को 5-4 से हरा दिया. टीम इंडिया 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीतने में कामयाब रही है. इससे पहले भारत को आखिरी पदक 1980 में मॉस्को में मिला था, जब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने पीला तमगा जीता था. उसके बाद से भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई और 1984 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में पांचवें स्थान पर रहने के बाद वह इससे बेहतर नहीं कर सकी थी.
अपना तीसरा ओलंपिक खेल रहे मनप्रीत टोक्यो में भारतीय दल का ध्वजवाहक भी रहे. मनप्रीत सिंह को 2017 में भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया था, जिसके बाद से टीम ने नई बुलंदियों को छुआ है. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम एशिया कप और एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी में गोल्ड, चैम्पियंस ट्रॉफी में सिल्वर और 2018 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी है. 2019 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) ने मनप्रीत को 'प्लेयर ऑफ द ईयर' घोषित किया था.
हाफ बैक पॉजिशन पर खेलने वाले 29 साल मनप्रीत सिंह ने दस साल की उम्र में हॉकी स्टिक थामा था. उन्हें हॉकी खेलने की प्रेरणा पूर्व कप्तान परगट सिंह से मिली, जो मनप्रीत के पैतृक गांव मीठापुर (जालंधर) के रहने वाले हैं. 2011 में मनप्रीत को भारतीय जूनियर टीम के लिए पदार्पण का मौका मिला. इसके बाद साल 2013 में उन्हें जूनियर हॉकी टीम का कप्तान नियुक्त किया गया. उस साल मनप्रीत की कप्तानी में भारतीय जूनियर टीम ने पहली बार सुलतान जोहोर कप का खिताब अपने नाम किया था.
2014 में एशियन हॉकी फेडरेशन ने मनप्रीत सिंह को जूनियर प्लेयर ऑफ द ईयर के अवॉर्ड से नवाजा. उसी साल भारतीय सीनियर टीम ने पाकिस्तान को मात देकर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था. इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स (2016) और चैम्पियंस ट्रॉफी (2016) में भारतीय टीम रजत पदक जीतने में सफल रही थी. टीम की इन सफलताओं में मनप्रीत सिंह ने अहम रोल अदा किया था.
टोक्यो का सफर : 2019 में मनप्रीत की कप्तानी में भारतीय पुरुष टीम ने ओलंपिक क्वालिफायर में रूस को कुल 11-3 के अंतर से मात देकर टोक्यो का टिकट हासिल किया. इस दौरान भारत ने भारत ने रूसी टीम को पहले चरण में 4-2 और दूसरे चरण के मैच में 7-1 से शिकस्त दी थी.