
पुलिस ने जिस्म फरोशी के जाल में फंसी लगभग तीन दर्जन लड़कियों को मुक्त कराया है. इन लड़कियों रोजगार दिलाने के नाम पर देह व्यापार करने वालों के हाथों सौंप दिया गया था. छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर ऐसे गिरोह सक्रीय हैं, जो इस काम को अंजाम दे रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से गायब दो सौ लड़कियों में से 32 को पुलिस ने बरामद किया है. इन सभी लड़कियों को उत्तर प्रदेश के इलाहबाद, उन्नाव और फिरोजाबाद जिले मुक्त कराया गया है. जहां इन्हें कोठों में रखा गया था. इन लड़कियों से नाच गाने के अलावा वैश्यावृत्ति करवाई जाती थी.
पुलिस के मुताबिक इस धंधे में सक्रीय एक गिरोह की महिलाएं लड़कियों को बड़े शहरो में अच्छा काम और मोटी तनखा दिलाने का लालच देकर अपने साथ ले जाती थीं. दो चार दिन उन्हें बड़े शहरो में घुमाने फिराने के बाद वैश्यावृत्ति कराने वाले गिरोह के हाथों सौंप दिया जाता था.
पुलिस ने इस गिरोह के मुख्य सरगना शेरू को भी धरदबोचा है. पुलिस ने बड़ी चालाकी से ना केवल इन लड़कियों को छुड़ाया बल्कि आरोपियों की धर पकड़ कर उन्हें अपने साथ ले आयी. छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेंज के अंतर्गत आने वाले बालोद जिले की पुलिस ने इस मिशन को अंजाम दिया.
बरामद की गई लड़कियों ने बताया कि महीने दो महीने तक ये अपने परिजनों से संपर्क रहा लेकिन अचानक इन लड़कियों के मोबाइल बंद हो गए. उनका बताया गया पता भी फर्जी निकला. पहले गिरोह के लोग इन लड़कियों को मुम्बई, कोलकाता और दिल्ली ले गए और बाद में उन्हें इलाहबाद, उन्नाव और फिरोजबाद में संचालित कोठों पर छोड़ दिया.
कई लड़कियां को बाहुबलियों के फार्म हॉउस तक में रखा गया. ऐसी ही एक लड़की उन्नाव से भाग निकली और वापस अपने घर लौट आई. उसने अपनी आपबीती पुलिस को बताई. उसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने लड़कियों को मुक्त कराने का अभियान शुरू किया था. जिसके तहत 32 लड़कियों को मुक्त करा लिया गया है.
दुर्ग रेंज के आईजी दीपांशु काबरा ने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस के ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को इस तरह के गिरोह पकड़ने के काम में लगाया गया है. बालोद के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद आरिफ के मुताबिक गैंग के सरगना शेरू से पूछताछ की जा रही है.
उसने पुलिस को बताया कि अकेले छत्तीसगढ़ से ही हजारों लड़कियां रोजगार की तलाश में उनके संपर्क में आई थी. उनमें से अधिकांश लड़कियां बस्तर और सरगुजा डिवीजन की हैं. शेरू खुद को इस गिरोह का मामूली सदस्य बता रहा है. हालांकि लड़कियों को कहा ठिकाने लगाया गया है वो बखूबी जानता है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.