
आजतक के महामंच 'एजेंडा आजतक' में एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने शिरकत की. कानून से बनेगा राम मंदिर सत्र में केटीएस तुलसी ने कहा कि सिख धर्म में भी ऐसी मुश्किलें आईं जहां गुरू अर्जुन देव की लाहौर के किले में शहीदी हुई. सिखों ने उस किले में गुरुद्वारा बनाया जिसे मुसलमानों ने तोड़कर मस्जिद बना दिया. फिर सिखों ने उसे तोड़कर गुरुद्वारा बना दिया.
कोर्ट से किस तरह की उम्मीद पर केटीएस तुलसी ने बताया कि लाहौर में गुरु अर्जुन देव शहीद हुए थे. वहां सिखों ने गुरुद्वारा बनवा दिया. मुस्लिमों ने उसे तोड़कर वहां मस्जिद बना दी फिर सिखों ने वहां गुरद्वारा बना दिया. इसके बाद मुसलमानों ने गलती की और मामले को लेकर अदालत चले गए जहां यह तय हुआ कि यह आस्था का मामला है और यहां गुरुद्वारा कायम रहेगा. लिहाजा, आस्था के ऐसे विषयों में कोर्ट क्या कर सकता है.
क्या कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण किया जा सकता है? इस पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने कहा कि अगर कानून बनाकर राम मंदिर के निर्माण के बारे में सोचा जाता है तो यह मंदिर के निर्माण में देरी को बुलावा देना है. उन्होंने बताया कि कानून बनने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जाएगा. कोर्ट नोटिस भेजेगा उसका जवाब मांगेगा, दोनों पक्षों को बुलाया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में डेढ़ साल से कम समय नहीं लगेगा.
केटीएस तुलसी ने कहा कि सबसे अच्छा यही होगा कि सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है वही चले. अगर जनवरी से लगातार सुनवाई होती है तो 4 महीने में निर्णय पर पहुंचा जा सकता है. उन्होंने साथ में यह भी बताया कि सुनवाई के लिए कोर्ट पर दबाब नहीं डाला जा सकता. तुलसी ने कहा कि मृत्यु के फैसले पर डाली गई पिटिशन सुनने के लिए कोर्ट आधी रात को बैठी क्योंकि अगले दिन फांसी होनी थी. राम मंदिर का मामला ऐसा नहीं है राम मंदिर का मामला टाइटल सूट है. इसका निपटारा ऐसे नहीं हो सकता.
केटीएस तुलसी ने कहा कि सबसे अच्छा यह है कि दोनों पक्ष आपस में बैठकर तय कर लें. आपसी सहमति से मंदिर बनाना ज्यादा सही होगा. राम मंदिर पर तुलसी ने कहा कि गुरु नानक ने भी कहा था कि राम का जन्म वहीं हुआ था.