
अमेरिका ने आतंक को पनाह देने वाले पाकिस्तान पर सख्त कार्रवाई करते हुए उसको मिलने वाली सभी सुरक्षा मदद पर रोक लगा दी है. ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को साफ कहा कि पाकिस्तान द्वारा अपनी जमीन पर पनपने वाले आतंकी नेटवर्क पर कोई कार्रवाई न करने से वे निराश हैं. अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान जब तक अपने यहां मौजूद हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करता, यह रोक जारी रहेगी.
इस रोक में सभी सुरक्षा संबंधी फंड और मिलिट्री साजो-सामान का ट्रांसफर भी शामिल होगा, हालांकि इसमें कुछ अपवाद हो सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका ने धार्मिक आजादी के मामले में भी पाकिस्तान को स्पेशल वाच लिस्ट में रखा है, क्योंकि उसका यह मानना है कि पाकिस्तान में धार्मिक आजादी का घोर उल्लंघन हो रहा है.
समाचार एजेंसी रायटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक यह सहायता पर पूरी तरह से रोक ही है और इस कार्यक्रम में फिलहाल किसी बदलाव का कोई इरादा नहीं है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीदर नावएर्ट ने इसकी घोषणा की, हालांकि उन्होंने यह विवरण नहीं दिया कि कुल कितनी राशि के फंड को राेका जाएगा. उन्होंने कहा कि यह रकम काफी ज्यादा है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हुई तो यह मदद फिर से दी जा सकती है.
इसके पहले एक ट्वीट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि पिछले 15 साल में अमेरिका ने पाक को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दी है. इसके बावजूद पाकिस्तान आतंकियों का सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है.
गौरतलब है कि इसके पहले ट्रंप प्रशासन ने करीब 25.5 करोड़ डॉलर की सहायता राशि यह कहकर लटका दी थी कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ज्यादा सख्ती दिखानी होगी. पाकिस्तान और अमेरिकी प्रशासन के बीच रिश्ते पिछले साल गर्मियों से तबसे बिगड़ने लगे, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान हिंसा और आतंक के एजेंटों का सुरक्षित पनाहगाह बन गया है.
एक अनुमान के अनुसार साल 2002 से अब तक अमेरिका पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद कर चुका है.