
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू राज्य को विशेष दर्जा दिलाने की अपनी मांग को लेकर लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं. एनडीए से अपनी राह अलग करने के बाद अब वे आंध्र प्रदेश पुनर्गठन एक्ट 2014 के तहत किए गए सभी वादों को पूरा करने का दबाव बना रहे हैं.
जगन रेड्डी की युवा जन श्रमिक रिथु कांग्रेस पार्टी (वाइएसआरसीपी), अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) और भाजपा, नायडू की 7 अप्रैल को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद नायडू ने स्वैच्छिक समूहों, कर्मचारी संघों और छात्र संगठनों को बुलाया है.
उनकी योजना मई 2019 के विधानसभा चुनाव तक राज्य को विशेष दर्जे के मसले को जिंदा रखने की है. नायडू शायद यह मान रहे हैं कि इस मामले में बागी तेवर अपनाने से उनकी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) को फिर जीत मिल सकती है. शायद इसीलिए वे बार-बार यह दोहरा रहे हैं कि किस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने उन्हें और आंध्र प्रदेश की जनता को धोखा दिया है.
नायडू ने बताया कि किस तरह से 8 अप्रैल को पीएम आवास के बाहर टीडीपी के सांसदों को प्रदर्शन करने से रोका गया, ''केंद्र सरकार का रवैया पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है. दिल्ली पुलिस कितनी अमानवीय है कि वह सांसदों की उम्र की भी परवाह नहीं करती.''
दूसरी तरफ वाइएसआरसीपी खुद को इस मसले पर ज्यादा आक्रामक दिखाने की कोशिश कर रही है. वाइएसआरसीपी की मानद अध्यक्ष और पार्टी प्रमुख जगन की मां वाइ.एस. विजयम्मा कहती हैं, ''सांसदों में फूट की वजह से केंद्र सरकार तवज्जो नहीं दे रही है.''
हाल के बजट सत्र की शुरुआत में ही वाइएसआरसीपी के सांसद इस्तीफा दे चुके हैं, इसलिए वाइएसआरसीपी अब तेलुगू देशम से खुलकर विरोध जताने और केंद्र सरकार को मजबूर करने के लिए कदम बढ़ाने को कह रही है और इस मामले में उसकी हिचकिचाहट पर उंगली उठा रही है. पार्टी के इस रुख से नायडू अधिक आक्रामक रुख अपनाने को मजबूर हुए हैं.
हालांकि नायडू के 'धोखे' वाली टिप्पणी के जवाब में भाजपा उन्हें एक 'भ्रष्ट विध्वसंक' बता रही है. भाजपा नेता राज्य की राजधानी अमरावती के निर्माण में भारी निवेश पर सवाल उठा रहे हैं और भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं. भाजपा विधायक दल के प्रमुख विष्णु कुमार राजू कहते हैं, ''ज्यादातर ठेके तेलुगू देशम और मुख्यमंत्री के करीबी लोगों को दिए गए हैं.''
दूसरी तरफ नायडू का दावा है कि भाजपा और वाइएसआरसीपी के बीच सांठगांठ है. नायडू अपनी पार्टी को भी हर तरह की परिस्थिति के लिए तैयार रहने को कह रहे हैं. उन्होंने अपने मंत्रियों को भी चेताया है कि एनडीए छोडऩे के बाद वे केंद्र सरकार की 'बदले की कार्रवाई' के लिए तैयार रहें. उनका अभियान तो मजबूत है, लेकिन क्या यह अगला चुनाव जीतने के लिए काफी है?
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