Advertisement

मेरठ हिंसा: मृतक जहीर का भाई बोला- धारा 144 में पुलिस ने क्यों चलाई गोली?

जहीर के बड़े भाई मोहम्मद शाहिद का कहना है कि उन्हें प्रशासन से नाराजगी है, भाई बीड़ी लेने गया था. पुलिस ने सड़क से ही गोली चलाई और जाकर उसे लग गई. उसके बीवी-बच्चे हैं. वो काम से आकर बीड़ी का बंडल लेने गया था. तब सारी दुकानें भी खुली थीं. पुलिस को गोली चलाने की जरूरत क्या थी, जब धारा 144 लगी थी.

जहीर के बड़े भाई मोहम्मद शाहिद (Photo- Aajtak) जहीर के बड़े भाई मोहम्मद शाहिद (Photo- Aajtak)
मिलन शर्मा
  • मेरठ,
  • 29 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:26 PM IST

  • मेरठ हिंसा में पुलिस की कार्रवाई में 5 की मौत
  • जहीर, मोहसिन, और आसिफ भी मारे गए

उत्तर प्रदेश के मेरठ में नए नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया. इस दौरान पुलिस एक्शन में 5 लोगों की जान चली गई. इसमें जहीर, मोहसिन, और आसिफ ऐसे नाम हैं, जिनके बार में बताया जा रहा है कि वे प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, लेकिन फिर भी पुलिस फायरिंग में उनकी जान चली गई. जहीर को जब गोली लगी तब नसीम अहमद वहां मौजूद थे. उनका कहना है जहीर वहां पत्थर पर बैठकर बीड़ी पी रहा था. बीड़ी अभी जलाई ही थी कि उसे गोली लग गई और एकदम से नीचे गिर गया.

Advertisement

नसीम का कहना है, 'हमने जहीर को उठाया तो देखा कि उसे गोली लगी है. हम जहीर को पास के ही एक डॉक्टर के पास लेकर गए. वहां कहा गया कि मेडिकल लेकर जाओ. फिर उसे मेडिकल ले गए जहां डॉक्टर ने उसे मृत बताया. जहीर की पोस्टमार्टम की कोई पर्ची या रिपोर्ट भी नहीं दी गई. वहीं, हमें कहा गया कि प्रशासन ने कहा है कि इसे जल्दी दफना देना, कहीं ऐसा न हो कि एक के चक्कर में पचासों बेगुनाह मारे जाए.'

'प्रशासन से नाराज हूं'

जहीर के बड़े भाई मोहम्मद शाहिद का कहना है, 'प्रशासन से नाराज हूं. भाई बीड़ी लेने गया था. पुलिस ने सड़क से ही गोली चलाई और उसे लग गई. उसके बीवी-बच्चे हैं. वो काम से आकर बीड़ी का बंडल लेने गया था. तब सारी दुकानें भी खुली थीं. पुलिस को गोली चलाने की जरूरत क्या थी, जब धारा 144 लगी थी.'

Advertisement

वहीं, नए नागरिकता कानून के खिलाफ हुई हिंसा में मोहसिन की भी पुलिस फायरिंग में मौत हो गई. मोहसिन के घरवालों का कहना है कि वो घर का सामान लेने गया था, तभी पुलिस ने गोली चलाई और मोहसिन को सीने में गोली लगी.

'जल्दी दफनाने का दबाव'

मोहसिन के भाई का कहना है, 'गोली लगने के बाद उसे कई अस्पतालों में लेकर भागे, लेकिन उसे कहीं एडमिट नहीं किया गया. बताया गया कि प्रशासन ने मना कर रखा है. मेडिकल ले गए तब तक उसकी बॉडी डेड हो चुकी थी, फिर हम घर लेकर आ गए. यहां से फिर उसे पोस्टमार्टम के लिए लेकर गए, तो साथ में दरोगा भी गया, पुलिस की गाड़ी भी गई थी. उनसे मैंने कहा तो दरोगा कहने लगा हमारी गोली नहीं, हमें मालूम है किसकी है और किसकी नहीं है, तुम पोस्टमार्टम करवा लो. फिर हम पर दबाव बनाया गया कि इससे जल्दी दफना दो. अभी तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी नहीं मिली.'   

मोहसिन की मां कहा कहना है, 'वो भैंसों का चारा लेने गया था. मैं नमाज से उठी तो हंगामे की आवाज आई. मैं कहने लगी मोहसिन नहीं आया. मैं भागी हुई गई तो देखा कि गोली चल रही है. मैंने पूछा कि मेरा मोहसिन कहां है, मेरा मोहसिन कहां है...मैं वहीं गिर गई, मुझे पता नहीं फिर क्या हुआ.' वहीं, मोहसिन की मां का कहना है कि वो पढ़ा लिखा भी नहीं था, वो प्रदर्शन के बारे में कुछ नहीं जानता था, उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनका क्या होगा, इंसाफ चाहिए.

Advertisement

'पुलिस ने कैमरे तोड़े'

इस हिंसा में एक अन्य शख्स आसिफ भी मारा गया. आसिफ, इमरान का बहनोई था. इमरान ने बताया, 'आसिफ काम पर से आए थे, तभी उन्हें गोली मारी. जब आसिफ को गोली लगी तो मैं उस वक्त बाहर गली में ही खड़ा था. पुलिस ने अंदर गली में आकर गोली चलाई और आसिफ को पीछे गोली मारी. रात को भी पुलिस वाले आए और कहा कि इन्हें जल्दी दफना देना.' इमरान ने कहा कि पहले पुलिस बाहर फायरिंग की, जब लोग बचाव के लिए भागे तो पुलिस गलियों में भी आई.

वहीं, इमरान का कहना है कि पुलिस ने कैमरे तोड़े. कैमरे में उनकी फुटेज आई होगी, लेकिन उन्होंने सब तोड़ दिए. इमरान का कहना है कि आंसू गैस तब छोड़े गए जब मामला पूरा शांत हो चुका था, जब लोग थे तो सीधे फायरिंग की गई. इमरान ने बताय कि आसिफ के तीन बच्चे हैं, अब वहीं नहीं रहे तो बहन और बच्चे मेरे पास हैं.

परिजनों के बयान पर एसएसपी

इस पर मेरठ के एसएसपी अजय कुमार साहनी का कहना है कि सारे घटनाक्रम की शुरुआत शुक्रवार को करीब 3 बजे से शुरू हुई. सारे घटनाक्रम के वीडियो और फोटोग्राफ पुलिस के पास उपलब्ध है. अगर कहीं प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था, तो पुलिस अपने आप गोलियां नहीं चलाती, क्योंकि पुलिस को पता है कि इसके परिणाम क्या होते हैं. जो भी स्थिति थी उसे पुलिस ने कंट्रोल किया.

Advertisement

एसएसपी ने कहा कि पुलिस द्वारा कोई भी फायरिंग लोगों की तरफ जानलेवा हथियार से नहीं की गई. कुछ हवाई फायरिंग जरूर पुलिस की तरफ से हुई है, वो भी लोगों की जान बचाने के लिए. बाकी पुलिस ने जो भी फायरिंग की है वो प्लास्टिक पैलेट्स और एंटी राइट्स का ही इस्तेमाल किया गया.

एसएसपी ने कहा कि जिन भी व्यक्तियों को इस मुकदमे में नामजद किया गया है या इस घटना में घायल हुए हैं या जिन्हें गोली लगी है सभी के परिजन ये कह रहे हैं कि वे दुकान पर बैठे हुए थे और घायल हो गए. यह तथ्य सत्य से बिल्कुल परे है. घंटों तक पथराव हो रहा है या फायरिंग हो रही है, तो कोई वहां बैठकर नहीं देखता रहेगा, वो वहां से हट जाएगा.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement