
राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का क्या पटाक्षेप होने वाला है? यह प्रश्न सुनते ही अयोध्या में विवादित परिसर के उत्तर में सटकर बसे मुहल्ला रामकोट में श्री रंगवाटिका मंदिर के सामने रहने वाले 68 वर्षीय कौशल किशोर की आंखें चमक उठती हैं. अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस के बाद 1993 में अयोध्या ऐक्ट के जरिए केंद्र सरकार ने विवादित स्थल के आसपास तकरीबन 79 एकड़ क्षेत्र का अधिग्रहण कर लिया था. इसके बाद अधिग्रहीत परिसर से सटे रामकोट और विभीषण कुंड वार्ड के करीब 400 परिवार बेहद सुरक्षा घेरे में आ गए थे. कौशल किशोर का परिवार भी इन्हीं में से एक था जिसने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद की बड़ी कीमत चुकाई है.
माता-पिता की इकलौती संतान कौशल किशोर घर के बाहर ही प्रसाद की पुश्तैनी दुकान चलाते थे. अधिग्रहण के बाद रामकोट इलाके में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद हो गया, परिणामस्वरूप कौशल किशोर को दुकान बंद करनी पड़ी. कुछ वर्ष अयोध्या से बाहर रहकर उन्होंने मजदूरी करके अपना खर्च चलाया पर बुजुर्ग माता-पिता की लगातार गिरती सेहत ने उन्हें रामकोट मुहल्ले में ही रहने को बाध्य कर दिया. रामकोट मुहल्ले का सुरक्षा घेरा इतना कड़ा था कि यहां मांगलिक या अन्य तरह के आयोजन बिल्कुल बंद हो गए. पारिवारिक मजबूरियों की वजह से कौशल किशोर ने विवाह नहीं किया और पूरे समर्पण के साथ माता-पिता की सेवा में लग गए.
समय गुजरता गया और इसी दौरान माता-पिता कौशल किशोर को अकेला छोड़कर अंतिम यात्रा पर निकल गए. कौशल किशोर ने फिर अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश की. 2006 में टेंपो खरीदकर चलाना शुरू किया, पर 2007 में फैजाबाद कचहरी में हुए बम ब्लास्ट के बाद विवादित परिसर की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई. उनके लिए टेंपो लेकर रामकोट आना-जाना काफी मुश्किल हो गया. कुछ दिन बाद उन्होंने टेंपो चलाना बंद कर दिया. कड़ी सुरक्षा से रामकोट मुहल्ले में किसी प्रकार के निर्माण कार्य में कई बंदिशें होने के कारण उनका पुश्तैनी मकान अब बेहद जर्जर हालत में पहुंच गया है. घर के बाहर कबाड़ हालत में खड़ा टेंपो उनकी बदहाली की कहानी बयान कर रहा है. कौशल किशोर कहते हैं, ''राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद ने रामकोट मुहल्ले के लोगों का जीवन जेल सरीखा कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट इस विवाद को सुलझा देता है तो यहां के लोगों को संगीनों के साये से आजादी मिल सकेगी.''
कौशल किशोर के घर से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर रामकोट मुहल्ले के दुराही कुआं इलाके में रहने वाले सरकारी स्कूल में शिक्षक 30 वर्षीय चंद्रशेखर मौर्य बचपन से सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में रहते-रहते अब ऊब चुके हैं. चंद्रशेखर बताते हैं, ''कड़े सुरक्षा घेरे के कारण कोई भी रिश्तेदार मेरे घर नहीं आता. रामकोट मुहल्ले में रहने वालों के लिए भी बिना परिचय पत्र के अपने घर पहुंच पाना नामुमकिन है. सभी लोग अब खुली हवा में सांस लेना चाहते हैं.'' अयोध्या के रामकोट और विभीषण कुंड वार्ड में रहने वाले करीब ढाई हजार लोग राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आने वाले निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
इन्हीं में रामकोट मुहल्ले के प्राचीन मंदिर कौशल्या भवन के संरक्षक 30 वर्षीय अभिषेक त्रिपाठी भी हैं. 1993 में विवादित परिसर अधिग्रहण के समय कौशल्या भवन के मुख्य द्वार समेत आगे का हिस्सा अधिग्रहण के दायरे में आ गया था. अभिषेक बताते हैं, ''अधिग्रहण की जद में आने के बाद से शेषावतार, साक्षी गोपाल, मानस भवन, विश्वामित्र आश्रम जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में पूजा पाठ ठप हो गया. इनके भवन भी जर्जर हो गए. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के नतीजे के बाद से इन मंदिरों की भी पुनर्स्थापना हो सकेगी.''
सुरक्षा की कसौटी पर रामनगरी
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर निर्णय का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा है अयोध्या में सुरक्षा एजेंसियों की चहलकदमी भी बढ़ती जा रही है. प्रदेश सरकार के सामने अयोध्या मसले पर सुरक्षा से जुड़े दो पूर्ववर्ती मॉडल हैं. पहला कल्याण सिंह सरकार का मॉडल है. 1992 में राम जन्मभूमि आंदोलन के समय कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे. कल्याण सिंह ने अयोध्या में भारी पुलिस बल तो लगाया लेकिन कारसेवकों को किसी प्रकार से रोकने की मनाही कर दी. नतीजा बड़ी संख्या में कारसेवक 6 दिसंबर को अयोध्या पहुंच गए और विवादित ढांचा ढहा दिया गया.
सुरक्षा का दूसरा मॉडल नवंबर, 2010 में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का है. अयोध्या विवाद पर हाइकोर्ट के फैसले वाले दिन पूरे प्रदेश में कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए गए थे. हर संवेदनशील जगह पर केंद्रीय पुलिस बल को तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी. नतीजा हाइकोर्ट के फैसले के बाद पूरे प्रदेश में शांति बनी रही. इस बार अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों को लेकर यहां के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा बताते हैं, ''सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के दिन और इसके बाद भी अयोध्या का जनजीवन आम दिनों की तरह ही चलता रहेगा. न कोई स्कूल बंद होगा, न ही कार्यालय. हां, गड़बड़ी फैलाने वालों से प्रशासन सख्ती से निबटेगा.
इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है.'' अयोध्या में प्रशासन भले ही सामान्य स्थिति बहाल करने का दावा कर रहा है लेकिन धीरे-धीरे यहां बढ़ रही सुरक्षाकर्मियों जुटान एक बार फिर लोगों में खौफ पैदा कर रही है. राम नगरी छावनी में तब्दील हो रही है. बाहर से अयोध्या पहुंचने वाले सुरक्षाबलों को 150 स्कूलों में ठहराने की व्यवस्था की गई है. क्या सुरक्षाबलों को स्कूलों में ठहराने से पढ़ाई बाधित नहीं होगी? अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी कहते हैं, ''स्कूल प्रबंधकों से बात करके उनसे उतने ही कमरे सुरक्षाबलों को देने को कहा गया जितने में अध्यापन कार्य ठीक से किया जा सके.'' अयोध्या में किसी भी गड़बड़ी से निबटने के लिए स्थानीय प्रशासन 2007 में तैयार किए गए 'सिक्यूरिटी प्लान' के अनुसार कार्य कर रहा है. इसके अलावा हर व्यक्ति की निगरानी करने का प्लान भी तैयार किया गया है (देखें ग्राफिक्स).
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने एक आदेश के जरिए पूरे जिले में 26 दिसंबर तक धारा 144 लागू कर दी है. इस आदेश के बाद जिले में किसी प्रकार की सभा या मीटिंग, रैली, यात्रा का आयोजन और विवादित स्थल के आसपास किसी प्रकार की वॉलराइटिंग प्रतिबंधित हो गई है. इसके अलावा सरकारी अफसरों को छोड़ कोई और अपने लाइसेंसी असलहा को लेकर नहीं निकल सकेगा. पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह बताते हैं, ''अयोध्या मसले पर माहौल बिगाड़ने वालों पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी.''
पक्षकारों में एका की चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद के कुल 16 पक्षकार हैं लेकिन इनमें से रामलला विराजमान, सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा ही मुख्य हैं. अयोध्या के संतों के बीच चल रही खींचतान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पक्षकारों की एकता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. 1885 में निर्मोही अखाड़ा के सरपंच रघुवरदास ने फैजाबाद के सिविल जज (जूनियर) के न्यायालय में एक वाद दायर कर विवादित परिसर के बाहरी हिस्से में मंदिर बनाने की अनुमति मांगी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. इसके बाद निर्मोही अखाड़ा के सरपंच भास्करदास कोर्ट में अयोध्या मसले के पक्षकार बने. भास्करदास अयोध्या की नाका हनुमान गढ़ी के महंत भी थे.
भास्कारदास की मृत्यु के बाद दिनेंद्र दास निर्मोही अखाड़ा के सरपंच बने. वहीं, नाका हनुमानगढ़ी के महंत की गद्दी रामदास को मिली. वर्चस्व को लेकर रामदास और दिनेंद्र दास के रिश्तों के बीच खटास काफी बढ़ चुकी है. रामदास निर्मोही अखाड़े के सरपंच के रूप में दिनेंद्र दास की तैनाती पर सवाल उठा चुके हैं. निर्मोही अखाड़े के सरपंच और अयोध्या मामले के पक्षकार के रूप में दिनेंद्र दास विवादित परिसर पर अपना दावा ठोक रहे हैं.
इस मामले के एक अन्य पक्षकार निर्वाणी अखाड़े के प्रमुख धर्मदास के गुरु अभिरामदास का नाम 22-23 दिसंबर, 1949 की रात बाबरी मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे राम मूर्ति रखने के आरोपियों पर दर्ज मुकदमे में शामिल था. धर्मदास अयोध्या मसले के मुख्य पक्षकार 'रामलला विराजमान' के संरक्षक त्रिलोकी नाथ पांडेय के वैष्णव संत न होने का आरोप लगा चुके हैं. पक्षकारों में एका के लिए विश्व हिंदू परिषद अयोध्या में कई बैठकें कर चुकी है. विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद गुप्ता कहते हैं, ''संतों में विवाद ठीक नहीं है. इसे दूर करने के लिए प्रयास लगातार जारी रहेंगे.'' अयोध्या मसले पर मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की बयानबाजी पर आपत्ति जता रहे हैं.
अंसारी कहते हैं, ''हम सुप्रीम कोर्ट का नतीजा मानेंगे लेकिन भाजपा नेता और कुछ संत ऐसे बयान दे रहे हैं जैसे कि नतीजा उन्हीं के हक में आने वाला है. यह माहौल खराब करने की साजिश है.'' प्रदेश की कई मस्जिदों और मंदिरों से भले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू-मुस्लिम में आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की गई हो लेकिन अयोध्या के राजनैतिक विश्लेषक इसे इतना आसान नहीं मानते. प्रतिष्ठित साकेत महाविद्यालय, अयोध्या के पूर्व प्राचार्य वी.एन. अरोड़ा कहते हैं, ''सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले पर चली 40 दिन लगातार बहस के दौरान जिस तरह सभी पक्षों में तीखी बहस चली उससे ऐसा नहीं लगता कि सभी लोग फैसले को इतनी आसानी से स्वीकार कर पाएंगे.''
संवरने लगी कार्यशाला
अयोध्या का फैसला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है पर अयोध्या के कारसेवकपुरम में 'श्री राम जन्मभूमि न्यास' की कार्यशाला को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है. कार्यशाला में प्रवेश के लिए एक भव्य द्वार बनाया जा रहा है. इस द्वार से प्रवेश करते ही पर्यटक राम मंदिर के प्रस्तावित मॉडल का दर्शन कर पाएंगे. कार्यशाला के अंदर एक परिक्रमा मार्ग भी बनेगा. पर्यटकों के लिए कार्यशाला में प्रवेश और निकलने के लिए अलग-अलग द्वार होंगे. कार्यशाला में मंदिर के पत्थर तराशने का कार्य चल रहा था. भूतल के लिए जरूरी सभी पत्थरों पर नक्काशी की जा चुकी है जिन्हें कार्यशाला में रखा गया है. अहमदाबाद के रहने वाले 70 वर्षीय अन्ना भाई सोमपुरा पिछले 30 वर्षों से कारसेवकपुरम में रहकर पत्थर तराशने के कार्य की देखरेख कर रहे हैं. 10 वर्ष पहले सोमपुरा के दामाद और नक्काशी के कार्य में माहिर रजनीकांत भी कारसेवकपुरम आकर रहने लगे. दो महीने पहले रजनीकांत की असामयिक मृत्यु के बाद फिलहाल पत्थर तराशने का काम बंद पड़ा है. सोमपुरा बताते हैं, ''राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम पूरा होने में अभी कम से कम तीन वर्ष लगेंगे.''
कारसेवकपुरम से आधा किलोमीटर दूर रामसेवकपुरम में रामकथा कुंज के लिए मूर्ति बनाने का काम सुस्त गति से चल रहा है. यहां पर भगवान राम के संपूर्ण जीवनकाल को पुत्रेयष्टि यज्ञ से लेकर राज्याभिषेक तक को करीब 100 स्क्रिप्ट के जरिए प्रदर्शित करने के लिए मूर्तियां बनाई जा रही हैं. असम के मूर्तिकार रंजीत मंडल की देखरेख में अब तक पुत्रेयष्टि यज्ञ से सीताहरण तक की लीलाओं को 40 मूर्तियों के जरिए तैयार किया जा चुका है. मंडल बताते हैं, ''अगर इसी गति से निर्माण कार्य चलता रहा तो शेष मूर्तियां तैयार करने में कम से कम तीन वर्ष और लगेंगे.''
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का समय करीब आते ही कारसेवकपुरम पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हो गया है. आम दिनों में कारसेवकपुरम की कार्यशाला में औसतन पांच से छह सौ पर्यटक आते थे अब यह संख्या दो से ढाई हजार पहुंच गई है. कार्यशाला के ठीक सामने परचून की दुकान चलाने वाले पंकज त्रिपाठी बताते हैं, ''अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या विवाद खत्म हो जाता है तो यहां पर्यटकों की आमद बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.'' पंकज ने भी अयोध्या विवाद समाप्त होने के बाद अपनी दुकान को एक बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में तब्दील करने का सपना संजोया है.
पंकज की तरह सभी अयोध्यावासियों की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं क्योंकि यहीं से उनके नए भविष्य का रास्ता भी निकलेगा.
चप्पा-चप्पा चौकसी
सुरक्षा घेरा अयोध्या को चार जोन रेड, येलो, ग्रीन और ब्लू में बांटकर सुरक्षा घेरा बनाया गया है. रेड जोन (अधिग्रहीत परिसर) में केंद्रीय सुरक्षा बल, येलो में स्थानीय पुलिस के साथ पीएसी लगाई जाएगी. ब्लू में अयोध्या के सीमावर्ती जिले बाराबंकी, गोंडा, बस्ती, अमेठी, सुल्तानपुर और आंबेडकर नगर में विशेष निगरानी व्यवस्था हो रही
अफसर नेटवर्क जनता को किसी तरह की असुविधा से बचाते हुए सुरक्षा को फूलप्रूफ बनाने के लिए दूसरे जिलों में तैनात सौ से अधिक ऐसे अधिकारियों को अयोध्या में अस्थाई तैनाती दी जा रही है जो पहले भी यहां तैनात रहे हैं. इन अधिकारियों में एसडीएम, एएसपी, डिप्टी एसपी, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर रैंक के अफसर शामिल हैं
डिजिटल वॉलंटियर जिले में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए खास 'सी-प्लान मोबाइल ऐप' तैयार किया गया है. इसमें 16 हजार डिजिटल वॉलंटियर जोड़े गए हैं. इन डिजिटल वॉलंटियर की सहायता से अयोध्या में संदिग्ध व्यक्ति और गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी. ऐप के जरिए सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकेगी
पुलिस मित्र अफवाहों से बचाने और प्रशासन का संदेश फौरन आमजन तक पहुंचाने के लिए अयोध्या में हर 10 से 15 लोगों के बीच एक पुलिस मित्र बनाया गया है. इसमें प्रधान, पार्षद, शिक्षकसमाज के प्रभावशाली व्यक्तियों को शामिल कर उनका व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है ताकि उनसे जानकारी तुरंत इकट्ठा की जा सके
जन चौपाल अयोध्या में तैनात जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत सभी अधिकारी गांव-मुहल्ले में जन चौपाल लगा रहे हैं. वे इनसे लोगों में फैली भ्रांतियां दूर करते हैं और माहौल बिगाड़ने की साजिश को बेअसर करने की रणनीति बनाते हैं
वॉल राइटिंग अयोध्या जिले में कुल 18,000 जगहों पर वॉल राइटिंग के जरिए सभी जरूरी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के मोबाइल फोन नंबर लिखवाए गए हैं. हर सात-आठ घर के बाद लिखे इन नंबरों पर फोन करके किसी तरह की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी जा सकती है
बंकर का जाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की तर्ज पर पूरे जिले में बंकरों का जाल बिछाया जा रहा है. हनुमानगढ़ी और विवादित स्थल की ओर जाने वाले सभी लिंक मार्गों पर अस्थाई बैरियर लगाकर पुलिस की तैनाती की गई है तथा हर व्यक्ति की गहन तलाशी के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है
सीसीटीवी कैमरे अयोध्या में विवादित स्थल से सटे रामकोट वार्ड के 100 से ज्यादाघरों की छतों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. ये कैमरे न केवल जिले के पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे बल्कि प्रशासन और पुलिस अफसरों के मोबाइल फोन भी इन कैमरों से लिंक होंगे ताकि हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा सके
***