
अयोध्या जमीन विवाद पर फैसला आने से पहले शिया वक्फ बोर्ड ने सभी वक्फ संपत्तियों पर होने वाले आयोजनों पर रोक लगा दी है. उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने वक्फ बोर्ड की अधीन स्थानों जैसे इमामबाड़ा मस्जिद, दरगाह, कार्यालय, कब्रिस्तान, मजार आदि पर अयोध्या मसले को लेकर किसी प्रकार का भाषण या धरना-प्रदर्शन आयोजन करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया.
अगर कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. आदेश की प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजी गई है. इससे पहले मुस्लिम संगठनों के कई पदाधिकारी, मौलवी और बुद्धिजीवियों ने अयोध्या मामले को लेकर शनिवार को बैठक की थी.
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संगठनों ने कहा था कि सभी को अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए. ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के अध्यक्ष नवेद हामिद द्वारा बुलाई गई बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हर कीमत पर शांति और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया गया.
RSS कर चुका है अपील
इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी निर्णय आए उसे सभी को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए. निर्णय के पश्चात देशभर में वातावरण सौहार्दपूर्ण रहे, यह सबका दायित्व है.
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मन की बात में संयम बरतने की अपील कर चुके हैं. पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा था कि 2010 में राम मंदिर पर जैसे ही फैसला आया तो राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, सभी संप्रदायों के लोगों, साधू-संतो और सिविल सोसाइटी के लोगों ने बहुत संतुलित बयान दिया था. न्यायपालिका के गौरव का सम्मान किया. इसे हमें ध्यान देना चाहिए कि देश में कितनी बड़ी ताकत है.