
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को भूमि पूजन होना है. प्रधानमंत्री मोदी खुद इसके लिए अयोध्या पहुंचने वाले हैं. जाहिर है लंबे समय से समाज के एक बड़े वर्ग में राम मंदिर को देखने की लालसा रही है. ऐसे में इस मंदिर को भव्य तो बनाया जाएगा ही, इसके साथ ही मंदिर निर्माण में प्रयोग किए जाने वाले पत्थर भी बेहद खास होने वाले हैं.
बताया जा रहा है कि मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान के भरतपुर का पत्थर इस्तेमाल किया जाएगा. भरतपुर के बंशी पहाड़पुर के पत्थरों के बारे में मान्यता है कि इसकी गुणवत्ता काफी अच्छी होती है. साथ ही यह लंबे समय तक चमकता रहता है.
इससे पहले भी भरतपुर से काफी मात्रा में राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर अयोध्या आ चुका है. भरतपुर के रुदावल क्षेत्र के बंशी पहाड़पुर के पत्थर का इस्तेमाल पहले भी कई प्राचीन इमारतों के निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो चुका है.
बंशी पहाड़पुर से निकलने वाले पत्थर की उम्र करीब 5000 वर्ष तक मानी जाती है. कहा जाता है कि इन पत्थरों पर पानी पड़ने से ये और ज्यादा निखर जाता है और हजारों वर्षों तक एक रूप में ही कायम रहता है.
जानकारी के मुताबिक राम मंदिर निर्माण के लिए 4 घन फुट पत्थर की जरुरत है, जो बंशी पहाड़पुर से जा रहा है. इस वजह से यहां के लोगों में भी काफी खुशी है. क्योंकि उनके क्षेत्र का पत्थर राम मंदिर निर्माण में काम आएगा.
पत्थर की नक्काशी करने वाले कारीगर भी काफी खुश हैं, क्योंकि उनके द्वारा बनाये जाने वाले पत्थर राम मंदिर बनाए जाने में इस्तेमाल होंगे.
भरतपुर जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर बयाना उपखंड स्थित बंशी पहाड़पुर क्षेत्र में चारों तरफ पहाड़ियां हैं. जिसमें से लाल पत्थर निकलता है. इस पत्थर से देश की ज्यादातर ऐतिहासिक इमारतें बनाई गई हैं. यहां से राम मंदिर निर्माण के लिए कई वर्षों से पत्थर ले जाने का काम जारी है.
साल 1990 में अयोध्या आंदोलन के दौरान भी बंशी पहाड़पुर काफी चर्चा में रहा था, क्योंकि राम शिला पूजन के लिए ''श्री राम'' लिखी विशेष प्रकार की ईंटों का निर्माण भी यहीं से कराया गया था.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर भेजने का काम एक बार फिर से तेज गति से शुरू हो गया है. इसके साथ ही भारी संख्या में यहां के कारीगर मंदिर निर्माण में काम आने वाले पत्थरों की नक्काशी के काम में लग गए हैं.