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बिहार: नीतीश पर यूं ही हमलावर नहीं हैं चिराग, तीखे तेवरों में छुपा है ये सियासी गणित

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में जेडीयू और एलजेपी के बीच रिश्ते तल्ख होते नजर आ रहे हैं. एलजेपी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए पर दबाव बना रही है तो जेडीयू राज्यपाल कोटे से मनोनीत होने वाली एमएलसी की 12 सीटों में से चिराग पासवान की पार्टी को हिस्सेदारी नहीं देना चाहती है.

एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST

  • बिहार में एनडीए के सहयोगी दलों में सीट शेयरिंग का पेच
  • बिहार की 12 MLC सीटों में से LJP की 2 सीट की डिमांड

बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए में सीटों को लेकर अबतक बात नहीं बनी है. एनडीए में जेडीयू और एलजेपी के बीच रिश्ते तल्ख होते नजर आ रहे हैं. एलजेपी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए पर दबाव बना रही है तो जेडीयू राज्यपाल कोटे से मनोनीत होने वाली एमएलसी की 12 सीटों में से चिराग पासवान की पार्टी को हिस्सेदारी नहीं देना चाहती है. जेडीयू-एलजेपी में छिड़े सियासी संग्राम के बीच बीजेपी ने साइलेंट मोड अख्तियार कर रखा है.

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एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने पिछले दिनों कार्यकर्ताओं को कहा था, 'बिहार में गठबंधन का स्वरूप बदल रहा है और पार्टी कार्यकर्ताओं को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए. एलजेपी को बिहार चुनाव को लेकर अपनी तैयारी पूरी रखनी चाहिए और अगर जरूरत पड़ी तो अकेले भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए.'

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चिराग पासवान पिछले कुछ दिनों से नीतीश सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. चिराग ने नीतीश सरकार की आलोचना करते हुए बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि नीतीश सरकार राज्य के 1 करोड़ 45 लाख बीपीएल लाभार्थियों को राशन कार्ड देने में विफल रही है. प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर भी चिराग नीतीश सरकार की आलोचना कर चुके हैं. एलजेपी ने यहां तक कह दिया है कि वह बीजेपी की सहयोगी है और जेडीयू की नहीं.

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ऐसे में एनडीए की एकता को 'चट्टानी' करार देने के लिए एलजेपी के मुंगेर जिला अध्यक्ष को चिराग पासवान ने हटाकर अपना तेवर दिखा दिया है. वहीं, जेडीयू भी एलजेपी के सवालों पर कोई प्रतिक्रिया न देकर नजरअंदाज करने के मूड में नजर आ रही है. बता दें कि पशुपति पारस के हाजीपुर से सांसद बनने के बाद नीतीश सरकार में एलजेपी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है.

एमएलसी सीटों का फॉर्मूला

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की 12 एमएलसी सीटें राज्यपाल के द्वारा मनोनीत होनी है. नीतीश कुमार ने इन 12 एमएलसी सीटों में से 7 जेडीयू और 5 बीजेपी को देने का मन बना रखा है. वहीं, एनडीए में इन एमएलसी सीटों के लिए एलजेपी ने 5-5-2 का फार्मूला सुझाया है. इस तरह से एलजेपी दो एमएलसी सीटों पर दावेदारी की ठोक रही है जबकि 5-5 सीटें जेडीयू और बीजेपी को देने की बात कही जा रही है. हालांकि, इस पर जेडीयू राजी नहीं है. नीतीश कुमार एमएलसी की सीटों में किसी भी सूरत में एलजेपी को हिस्सा नहीं देना चाहते हैं. इसे लेकर दोनों ओर से बयानबाजी जारी है.

विधानसभा सीट शेयरिंग

बिहार में एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार को लेकर सभी सहमत हैं, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर पेच फंसा हुआ है. लोकसभा चुनाव में एलजेपी को बिहार की 40 में से 6 सीटें दी गई थी. इसके अलावा रामविलास पासवान को बीजेपी ने अपने कोटे से राज्यसभा भेजा है. इसी पैटर्न के तहत एलजेपी विधानसभा चुनाव में करीब 43 सीटों पर दावेदारी कर रही है. वहीं, बिहार की 243 सीटों में से बीजेपी-जेडीयू 105-105 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है और शेष 33 सीटें एलजेपी को देना चाहती है, जिस पर चिराग पासवान राजी नहीं है.

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बता दें कि 2015 के चुनाव में एलजेपी ने 42 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद एलजेपी को पिछली बार की तरह तवज्जो नहीं मिल पा रही है. इसीलिए चिराग पासवान चिंतित हैं. एलजेपी 2005 के विधान सभा चुनाव का उदाहरण पेश कर रही. एलजेपी ने बिना तालमेल के 178 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें 29 पर जीत मिली और उसे 12.62 फीसदी वोट मिले थे. इसी आधार पर वो खास तवज्जो चाहते हैं.

हालांकि, पिछले दिनों बीजेपी के राज्यसभा सांसद और बिहार के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने चिराग पासवान से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात कर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश भी की थी. इसके बाद भूपेंद्र यादव बिहार में नीतीश कुमार से भी मिले थे. इसके बाद भी एनडीए में जेडीयू और एलजेपी के बीच मनमुटाव खत्म नहीं हो सका है.

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