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नीतीश और तेजस्वी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है बिहार उपचुनाव

एक तरफ जहां भाजपा के साथ फिर से गठबंधन कर सरकार बनाने के बाद नीतीश की पहली चुनावी परीक्षा है. वहीं, आरजेडी सुप्रीमो और अपने पिता लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले में जेल जाने के बाद यह तेजस्वी की भी बड़ी परीक्षा है.

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव
अजीत तिवारी/रोहित कुमार सिंह
  • पटना,
  • 10 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 9:08 PM IST

बिहार की एक लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर 11 मार्च को होने वाले उपचुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

एक तरफ जहां भाजपा के साथ फिर से गठबंधन कर सरकार बनाने के बाद नीतीश की पहली चुनावी परीक्षा है. वहीं, आरजेडी सुप्रीमो और अपने पिता लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले में जेल जाने के बाद यह तेजस्वी की भी बड़ी परीक्षा है.

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अररिया लोकसभा समेत जहानाबाद और भभुआ विधानसभा सीट पर होने वाले चुनाव के नतीजे भविष्य में प्रदेश की राजनीति की दशा और दिशा तय करेंगे. अररिया लोकसभा सीट और भभुआ विधानसभा सीट पर भाजपा ने उम्मीदवार खड़े किए हैं और जहानाबाद पर जदयू ने.

बता दें कि नीतीश कुमार के लिए जहानाबाद उपचुनाव बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि नीतीश कुमार ने पहले ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी जदयू उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी, लेकिन भाजपा के आग्रह के बाद जदयू ने जहानाबाद सीट पर उम्मीदवार खड़ा किया.

वहीं, महागठबंधन की बात करें तो उपचुनाव में तीनों सीटों पर आरजेडी ने चुनाव लड़ने का पहले ही ऐलान कर दिया था. लेकिन कांग्रेस ने जब भभुआ से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई तो लालू प्रसाद यादव ने भभुआ सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी.

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इस उपचुनाव में आरजेडी, कांग्रेस, जदयू और भाजपा चारों पार्टियों द्वारा उम्मीदवार उतारने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है.

वहीं, लालू के जेल जाने के बाद अब पार्टी की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में है और जिम्मेदारी संभालने के बाद तेजस्वी यादव के लिए भी यह पहली चुनावी परीक्षा है. अररिया लोकसभा और जहानाबाद विधानसभा सीट अब तक आरजेडी के पास थी और ऐसे में यह दोनों सीटें जीतना तेजस्वी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है.

गौरतलब है कि इस उपचुनाव में अगर भाजपा जदयू गठबंधन तीनों सीटों पर चुनाव जीत जाती है तो कहीं ना कहीं यह नीतीश कुमार का महागठबंधन को छोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाने के फैसले पर मुहर होगी. दूसरी तरफ अगर आरजेडी तीनों सीटों पर चुनाव जीत जाती है तो यह बिहार की राजनीति में तेजस्वी युग के उदय का संकेत होगा.

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