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बीजेपी का तंज- आधे-अधूरे पर्यावरण विभाग के सहारे प्रदूषण से निपटेगी केजरीवाल सरकार!

अब सवाल उठने लगे हैं कि जब दिल्ली में पर्यावरण सचिव और दिल्ली प्रदूषण कमेटी का अध्यक्ष पद ही खाली है, तो फिर दिल्ली की केजरीवाल सरकार कैसे लड़ेगी प्रदूषण से?

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
दिनेश अग्रहरि/रोहित मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 5:46 AM IST

प्रदूषण को लेकर लगातार सुप्रीम कोर्ट से लेकर सरकार गंभीरता दिखा रही है, लेकिन अब सवाल उठने लगे हैं कि जब दिल्ली में पर्यावरण सचिव और दिल्ली प्रदूषण कमेटी का अध्यक्ष पद ही खाली है, तो फिर दिल्ली की केजरीवाल सरकार कैसे लड़ेगी प्रदूषण से?

 इन सवालों के साथ बीजेपी ने प्रदूषण को लेकर केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है. दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी विधायक विजेन्द्र गुप्ता ने सवाल उठाए हैं कि एक तरफ सरकार प्रदूषण को लेकर की कदम उठाने की कोशिश का दावा कर रही है, यहां तक कि ऑड-इवन जैसे सख्त कदम उठाने को तैयार है, लेकिन पर्यावरण सचिव तथा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के अध्यक्ष पद भरने को लेकर वह गम्भीर नहीं है.

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 उन्होंने पूछा कि आधे-अधूरे पर्यावरण विभाग के सहारे बढ़ते प्रदूषण से कैसे लड़ेगी सरकार? उन्होंने मांग की कि बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार योग्य पर्यावरण सचिव तथा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के पद तुरंत भरे. राजधानी में वायू प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है और आगे आने वाले समय में प्रदूषण की मात्रा और अधिक बढ़ने वाली है. सरकार ऑड-इवन योजना लागू करने की तैयारी कर रही है. हो सकता है कि स्कूल भी बंद करने पड़ें. इसके अतिरिक्त सरकार को कई अन्य कड़े कदम उठाने पड़ेंगे.

 विपक्ष के नेता ने कहा कि एक ओर जहां प्रदूषण का स्तर इतने खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति के मामले में लापरवाही दिखा रही है. वह पूर्णकालिक पर्यावरण सचिव तथा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी का नियमित अध्यक्ष नियुक्त करने में विफल रही है. उन्होंने आशंका जताई कि इस अक्षम व अधूरी प्रशासनिक व्यवस्था के साथ प्रदूषण से लड़ाई जीत पाना मुश्किल होगा.

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 विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण सचिव और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के अध्यक्ष के पद पर एक ही अधिकारी विराजमान है. उन्हें पर्यावरण के क्षेत्र में पदों के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यताएं, पर्यावरण के क्षेत्र में अपेक्षित अनुभव नहीं है. वे प्रदूषण की वर्तमान स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं हैं. विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे अविलम्ब पर्यावरण सचिव तथा कमेटी के अध्यक्ष पद पर ऐसे पूर्णकालिक अधिकारियों को लगाएं जो अपेक्षित योग्यताएं तथा अनुभव रखते हों. 

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