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इंटरनेट चलाने से रोका तो बच्चे ने मां पर किया चाकू से हमला

इंटरनेट का बच्चों पर कितना बुरा प्रभाव पड़ रहा है इसका नजारा महाराष्ट्र के पुणे में देखने को मिला. 15 साल के स्टूडेंट को इंटरनेट का ऐसा भूत सवार था कि वो पूरे टाइम स्मार्टफोन और कंप्यूटर से चिपका रहता था.

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aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2014,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST

इंटरनेट का बच्चों पर कितना बुरा प्रभाव पड़ रहा है इसका नजारा महाराष्ट्र के पुणे में देखने को मिला. 15 साल के स्टूडेंट को इंटरनेट का ऐसा भूत सवार था कि वो पूरे टाइम स्मार्टफोन और कंप्यूटर से चिपका रहता था. मां ने जब उसे इंटरनेट पर काम करने से रोका तो बेटे ने मां पर ही चाकू से हमला कर दिया.

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एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक पुणे में रहने वाला 15 साल का साइंस स्टूडेंट घंटों अपने स्मार्टफोन और कंप्यूटर से चिपका रहता था. पढ़ाई, परिवार और दोस्तों को नजरअंदाज करते हुए वो बस इंटरनेट पर लगा रहता था. व्हाट्सऐप, वाइबर और वीचैट जैसी एप्लीकेशन पर उसके करीब 500 दोस्त थे, जिनमें से ज्यादातर को वो जानता भी नहीं था.

इस स्टूडेंट की मां स्कूल में पढ़ाती है. 47 वर्षीय मां अपने बेटे के इस बर्ताव से बहुत परेशान थी और एक दिन उसने उसका कंप्यूटर बंद कर दिया और स्मार्टफोन भी छीन लिया. इस बात से लड़के को इतना गुस्सा आ गया कि उसने अपनी मां पर चाकू से हमला कर दिया. मगर इससे पहले कि वह कुछ कर पाता, चीख-पुकार सुनकर लड़के के पापा वहां आ गए और उन्होंने उसके हाथ से चाकू छीन लिया.

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अगले दिन उसके पैरंट्स इसे मुंबई ले गए और बाइकुला के मसीना हॉस्पिटल में साइकायट्रिक ट्रीटमेंट के लिए भर्ती करवा दिया. पहले तो इस लड़के ने हॉस्पिटल जाने में कोई आनाकानी नहीं की, लेकिन वहां पहुंचकर उसने एक और हरकत कर डाली. इस लड़के ने अपने मां-बाप के फैसले का विरोध करते हुए अपने सारे कपड़े उतार डाले. हॉस्पिटल के एक डॉक्टर ने बताया, 'लड़का अपनी ऑनलाइन जिंदगी में इस तरह से खो गया था कि वह अपना मेंटल बैलंस खो चुका था.' फिलहाल ये स्टूडेंट शॉक ट्रीटमेंट के बाद सोमवार को वापस पुणे आ गया है, लेकिन अभी रीहैब में जाकर उसे तीन और सेशन लेने होंगे.

पुणे का यह लड़का अपने कमरे में स्मार्टफोन और कंप्यूटर के साथ घंटों बंद रहता था. जब वह 12 साल का था, तो उसके पापा ने उसे फोन दिया था. वह शुरू से ही 30 मिनट तक सर्फिंग और गेमिंग करता था, लेकिन फिर धीरे-धीरे वह ज्यादा टाइम देने लगा. पैरंट्स ने बताया कि वह सिर्फ ऑनलाइन दोस्तों से बात करता था. यहां तक कि इंटरनेट पर बात करने के लिए कभी-कभी वह स्कूल भी नहीं जाता.

धीरे-धीरे उसने दोस्तों से मिलना और बात करना कम कर दिया. वह उनसे बात करते वक्त असहज हो जाता था. उन्होंने उसे एक बोर्डिंग स्कूल में डाला तो वह बीमार हो गया. उसे एक हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया तो वहां से वह भागकर घर आ गया. पैरंट्स को पता नहीं था कि वह किसलिए भागा, क्योंकि बोर्डिंग स्कूल में इंटरनेट आसानी से उपलब्ध नहीं था.

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जब भी वे उससे बात करते, वह कहता- आप मुझे डिस्टर्ब कर रहे हैं, मुझे अकेला छोड़ दो. जब पैरंट्स ने उस पर नजर रखना शुरू किया, तो वह इंटरनेट रिचार्ज करने के लिए चोरी करने लगा. बाद मे पैरंट्स ने उसे डॉक्टर्स को दिखाना चाहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया. बाद में जब उसने अपनी मां पर हमला किया, तब जाकर उसे हॉस्पिटल ले जाया गया.

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