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''यहां से पचास पचास कोस दूर गांव में जब बच्चा रोता है तो मां कहती है, बेटे सो जा... सो जा... नहीं तो गब्बर सिंह आ जाएगा..''. फिल्म शोले में बोला गया अमजद खान का ये डायलॉग आज भी लोगों की जुबां पर चढ़ा हुआ है. किस्से हैं कि जब फिल्म शोले रिलीज हुई तो ये डायलॉग इस कदर लोकप्रिया हुआ कि माएं बच्चे को सुलाते वक्त ये मशहूर डायलॉग कहा करती थीं.
लेकिन क्या आपको मालूम है चंबल के जिस रियल लाइफ डकैत से प्रेरित होकर शोले का ये डायलॉग लिखा गया था उसका नाम मोहर सिंह गुर्जर था. चंबल घाटी में रोबिनहुड के नाम से मशहूर मोहर सिंह का 92 साल की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया है. वे लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे. 1982 में आई बॉलीवुड फिल्म चंबल के डाकू में मोहर सिंह ने काम किया था.
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बात करें फिल्म शोले की तो ये फिल्म जबरदस्त हिट हुई थी. फिल्म में अमजद खान ने डाकू गब्बर सिंह का रोल किया था. उन्होंने इस किरदार को जीवंत कर दिया था. सालों बाद भी उनके बोले गए डायलॉग लोगों के बीच हिट हैं. शोले से अमजद खान के कई डायलॉग फेमस हुए. इनमें बेटा सो जा गब्बर आ जाएगा के अलावा, कितने आदमी थे रे कालिया, अब तेरा क्या होगा कालिया, जो डर गया सो मर गया, जब तक तेरे पैर चलेंगे उसकी सांसे चलेंगी... जैसे संवाद शामिल हैं.
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जानें डाकू मोहर सिंह के बारे में
1960 मे बंदूक लेकर बीहड़ में कूदने वाले मोहर सिंह के नाम से चंबल घाटी थर्रा जाती थी. उनका खौफ ऐसा था कि हर कोई उनके नाम से ही कांप जाता था. डकैत मोहर सिंह ने 12 सालों तक बीहड़ों पर राज किया था. बाद में 1972 मे उन्होंने समर्पण कर दिया था. इसके बाद वे परिवार के साथ रहकर खेती बाड़ी का काम करने लगे थे. लोग कहते हैं कि जमीनी विवाद के चलते जब पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं कि तो मोहर सिंह बंदूक का दामन थामकर बीहड़ में कूद गए थे. आत्म समर्पण के बाद मोहर सिंह ने राजनीति में भी हाथ अजमाया और नगर पंचायत मेहगांव के अध्यक्ष चुने गए थे.