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भक्‍त के विश्‍वास की विजय का पाठ है सुंदरकांड

मंगलवार और शनिवार को अक्‍सर ही मंदिरों में या फिर घरों में सुंदरकांड का पाठ किया जाता है. कई बार तो किसी शुभ कार्य से पहले भी गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है.

सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व है सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व है
वन्‍दना यादव
  • नई दिल्ली,
  • 17 मई 2016,
  • अपडेटेड 5:24 PM IST

जब भी किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां हों, कोई काम नहीं बन रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो तो सुंदरकांड का पाठ करने से सारी समस्‍याओं का समाधान खुद ही निकलने लगता है. कई बार विद्वान पंडित और ज्‍योतिष भी कष्‍टों का निवारण करने के लिए सुंदरकांड का पाठ करवाने की सलाह देते हैं.

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सुंदरकांड के करने के है मनोवैज्ञानिक लाभ
श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है. संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है. सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का कांड है. मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड है. सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है. किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है.

क्‍या है सुंदरकांड
हनुमानजी जो कि वानर थे, वे समुद्र को लांघकर लंका पहुंच गए और वहां सीता की खोज की. लंका को जलाया और सीता का संदेश लेकर श्रीराम के पास लौट आए. यह एक भक्त की जीत का कांड है जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है. सुंदरकांड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं. इसलिए पूरी रामायण में सुंदरकांड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता है. इसी वजह से सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से किया जाता है.

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इस कांड का पाठ करने से बनी रहती है हनुमानजी की कृपा
हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है. शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं, इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकांड का पाठ करना है. सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है. किसी भी प्रकार की परेशानी हो, सुंदरकांड के पाठ से दूर हो जाती है.

हनुमानजी के पूजन में इन बातों का ध्‍यान रखें
हनुमानजी के पूजन और दर्शन के लिए शास्त्रों के अनुसार कुछ नियम बताए गए हैं, पूजन और दर्शन करते समय इन नियमों का पालन चाहिए....
- हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है. भक्तों को इनकी तीन परिक्रमा ही करनी चाहिए.
- दोपहर के समय बजरंग बली को गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनी रोटी का चूरमा अर्पित किया जा सकता है.
- हनुमानजी को शाम के समय फल जैसे आम, केले, अमरूद, सेवफल आदि का भोग लगाना चाहिए.
- सुंदरकांड का पाठ करते समय हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल और अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित करना चाहिए.

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