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समरी विधानसभा क्षेत्रः कांग्रेस के कब्जे में है BJP का ये दुर्ग, क्या छुड़ा पाएगी रमन सिंह?

छत्तीसगढ़ के समरी विधानसभा सीट पर बीजेपी वापसी के लिए हिंदुत्व की बिसात बिछाने में जुटी है. जबकि कांग्रेस दोबारा से जीत हासिल करने के लिए क्षेत्रीय विधायक पांच साल में कराए गए विकास कार्यों की दुहाई दे रहे हैं.

समरी से कांग्रेस विधायक डॉ. प्रीतमराम समरी से कांग्रेस विधायक डॉ. प्रीतमराम
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

छत्तीसगढ़ का समरी विधानसभा क्षेत्र बीजेपी का मजबूत दुर्ग रहा है. कांग्रेस 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के इस गढ़ में सेंधमारी करने में कामयाब रही थी. पांच साल बाद अब बीजेपी इस सीट पर अपनी वापसी की तैयारी कर रखी है तो कांग्रेस भी यहां अपना वर्चस्व बचाए रखने की कोशिश में जुटी है.

3 दशक के बाद कांग्रेस ने हासिल की थी जीत

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आदिवासी बहुल समरी विधानसभा सीट पर 1980 के बाद बीजेपी महज दो बार हारी है. पहली बार 1984 में और उसके बाद पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2013 में. बीते चुनाव में इस सीट से कांग्रेस, बीजेपी और बसपा सहित कुल 10 उम्मीदवार मैदान में थे. इन चुनावों में कांग्रेस के डॉ. प्रीतमराम ने बीजेपी के सिद्धनाथ पैकरा को करारी मात दी, बसपा उम्मीदवार यहां चौथे नंबर पर रहा जबकि आश्चर्यजनक रूप से नोटा को यहां तीसरा स्थान मिला.

कांग्रेस ने बीजेपी को 31 हजार 825 मतों से दी मात

समरी सीट पर 2013 में कुल 1 लाख 86 हजार 219 मतदाता थे. इनमें से 1 लाख 55 हजार 189 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इस तरह से यहां 83.39 फीसदी वोटिंग हुई. कांग्रेस प्रत्याशी को 82 हजार 585 वोट मिले थे, जो की कुल वोटों का 53 फीसदी था. जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 50 हजार 762 वोट मिले यानी कुल 33 फीसदी वोट मिले. बसपा को महज 2.11 फीसदी वोट मिले.  इस तरह से कांग्रेस उम्मीदवार ने बीजेपी प्रत्याशी को 31 हजार 825 मतों से मात देकर जीत हासिल की थी.

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2003 और 2008 में सिद्धनाथ पैकरा बने थे बीजेपी के MLA

हालांकि 2013 से पहले ये सीट छत्तीसगढ़ में बीजेपी की मजबूत सीटों में गिनी जाती थी. छत्तीसगढ़ के गठन के बाद 2003 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सिद्धनाथ पैकरा ने कांग्रेस के महेश्वर पैकरा को करीब 13 हजार मतों से मात दी थी. 2008 के विधानसभा चुनाव में भी सिद्धनाथ पैकरा ने कांग्रेस के चिंतामणि महाराज को 30 हजार मतों से मात दी.

'ईसाई और मुस्लिम प्रेम में हारी बीजेपी'

समरी विधासभा सीट मौजूदा समय में बलरामपुर जिले में आती है. बीजेपी के जिला अध्यक्ष शिवनाथ यादव कहते हैं कि 2013 के चुनाव में ईसाइयों और मुसलमानों पर हद से ज्यादा भरोसा करने के चलते हमारा वोट बैंक खिसक गया था. हिंदू मतों से छिटक जाने से बीजेपी की हार हुई थी.

करणी सेना हिंदुत्व की बिछा रही बिसात

यादव ने कहा कि पिछले चुनाव की हार से सबक लेते हुए हम अपने मूल वोट बैंक को साधने के लिए हिंदुत्व की राह पर चल रहे हैं. इसके लिए हमने समरी विधानसभा क्षेत्र में करणी सेना बना रखी है, जो घर-घर जाकर हिंदुत्व का अलख जगा रही है.

उन्होंने बताया कि बीजेपी ने अभी तक तय नहीं है कि समरी विधानसभा से कौन उम्मीदवार होगा. हालांकि पार्टी आलाकमान जिसे भी मैदान में उतारेगी उसकी जीत निश्चित है.  

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कांग्रेस को विकास का सहारा

कांग्रेस से मौजूदा विधायक डॉ. प्रीतमराम ने आजतक से बात करते हुए कहा कि इस सीट पर ज्यादातर विधायक बीजेपी के रहे हैं. इसके बावजूद समरी क्षेत्र विकास से कोसों दूर है. प्रदेश का सबसे ज्यादा बॉक्साइट और कोयला उत्खनन इसी क्षेत्र में होता है. इसके बाद भी यहां लोगों को रोजगार नहीं मिला है.

प्रीतमराम ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए हमने पांच साल में काफी विकास कार्य किए हैं. इनमें सड़क से लेकर सिंचाई तक की व्यवस्था शामिल है. हमें अपने विकास कार्यों पर भरोसा है. बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड की सच्चाई से आदिवासी वाकिफ हो चुके हैं. वो अब इनके झांसे में नहीं आने वाले.

उन्होंने कहा कि रमन सरकार ने पिछले 15 साल में राज्य के साथ-साथ समरी को भी पीछे रखने का काम किया है. हम अपने पांच साल के कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं.

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