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भावुक सोनिया ने अगस्ता विवाद पर PM को दिया जवाब- भारत मेरा घर, यही जियूंगी यही मरूंगी

सोनिया गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका जन्म भले ही इटली में हुआ, लेकिन वह बहू के तौर पर भारत आईं और अब यहीं मरना भी चाहती हैं.

तिरुवनंतपुम में सोनिया गांधी तिरुवनंतपुम में सोनिया गांधी
संदीप कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2016,
  • अपडेटेड 11:12 PM IST

अगस्ता वेस्टलैंड विवाद पर केंद्र सरकार के हमले झेल रहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को करारा जवाब दिया है. सोमवार को तिरुवनंतपुरम में एक चुनावी रैली में बोलते हुए सोनिया भावुक हो हुईं. उन्होंने कहा कि वह हिंदुस्तान में जियेंगी और हिंदुस्तान में ही मरेंगी.

सोनिया गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका जन्म भले ही इटली में हुआ, लेकिन वह बहू के तौर पर भारत आईं और अब यहीं मरना भी चाहती हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'मोदी मेरे देशप्रेम को नहीं समझ सकते. वह मुझसे मेरा भारत प्रेम नहीं छीन सकते.'

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तेकीनकाडु मैदान से अपने चुनाव प्रचार अभियान का आगाज करते हुए सोनिया गांधी मोदी सरकार पर जमकर प्रहार किया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकारें असंवैधानिक और अंदरखाते की चालों से गिराई जा रही हैं. उन्होंने सीपीएम नीत एलडीएफ पर भी हमला किया और कहा कि यह विकास विरोधी है और हिंसा की राजनीति कर रही है.

सोनिया के भाषण के प्रमुख अंश:

- भारत मेरा घर है और मैं अंतिम सांस यहीं लूंगी.

- मेरी अस्‍थियां भी इसी मिट्टी में मिलेंगी.

- मैंने अपनी जिंदगी के 48 साल यहां गुजारे हैं.

- मैं इटली में पैदा हुई हूं. लेकिन 1968 में इंदिरा गांधी की बहू के तौर पर भारत आई.

- इटली में परिवार होने पर शर्म नहीं, इटली में मेरी 93 साल की मां है.

- मोदी मेरे देशप्रेम को नहीं समझ सकते, मेरे भारत प्रेम को नहीं छीन सकते.

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- संघ हमेशा मुझे गाली देगा, निचले स्तर के आरोप लगाएगा.

- अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हमारी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकारें असंवैधानिक और अंदरखाते की सौदेबाजी से गिराई जा रही हैं.

- बीजेपी सरकार विश्वविद्यालयों, न्यायपालिका, एनजीओ और सिविल सोसाइटी के लिए खतरा है.

- विश्वविद्यालयों को नोटिस पर रखा गया है, न्यायपालिका को धमकी दी जा रही है, एनजीओ और सिविल सोसाइटी खामोश किए जा रहे हैं.

- अल्पसंख्यक, दलित, महिलाएं और आदिवासी भी संकट में हैं.

- राजनीतिक पार्टियां व अन्य तबके, जो सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं उनके साथ देशद्रोही जैसा बर्ताव किया जा रहा है.

- प्रधानमंत्री के पास अपने भव्य कार्यक्रमों के लिए काफी वक्त है. लेकिन जब किसानों की दशा की बात आती है तो वह मुंह फेर लेते हैं.

- मनरेगा जैसी योजनाएं और कुटुंबश्री जैसे स्व सहायता समूहों के लिए कोष घटाया गया.

- यूपीए सरकार द्वारा स्थापित समुद्रपारीय मामलों के मंत्रालय को बंद करने से केरल के प्रवासियों को परेशानियां पेश आई हैं.

- केरल धर्मनिरपेक्षता का अच्छा उदाहरण है और एक प्रगतिशील राज्य है, लेकिन यह बीजेपी और आरएसएस से प्रणालीगत हमलों का सामना कर रहा.

- सीपीएम नीत एलडीएफ विकास विरोधी है और वे हिंसा की राजनीति कर रहे हैं.

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