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1 जुलाई को आ रहा है GST, सरकार के साथ-साथ ‘चोर’ भी तैयार

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों को जीएसटी को फोकस में रखते हुए अपने आईटी आर्किटेक्चर में बदलाव करने की जरूरत है. सिक्योरिटी को मजबूत करना और सिस्टम में सिक्योरिटी कंफ्यूगरेशन लगाने की जरूरत है.

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Munzir Ahmad
  • नई दिल्ली,
  • 20 जून 2017,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

1 जुलाई से जीएसटी के लिए देश तैयार है. हम सब तैयार हैं. सरकार तैयार है और साइबर चोर भी तैयार हैं. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने अगाह किया है कि अगर फायरवॉल मजबूत न किया जाए तो बड़े साइबर हमले हो सकते हैं.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार और प्राइवेट कंपनियां साइबर खतरे से निपटने के लिए बेहतर उपाए नहीं करती हैं तो जीएसटी के बाद साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी घटनाओं में बढ़ोतरी हो सकती है. 

उदाहरण के तौर पर जीएसटी लागू होने के बाद अगर डेटा लीक होता है तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं , क्योंकि इसका असर सीधा आम लोगों को पड़ेगा.  हालिया आधार डेटा लीक को देखते हुए एक्सपर्ट्स की आशंका सही लगती है. क्योंकि आधार लीक होना काफी गंभीर है और ऐसी घटनाएं आगे चलकर लोगों के लिए काफी मुश्किल में डाल सकती हैं.
 
PwC  इंडिया पार्टनर एंड लीडर साइबर सिक्योरिटी के मुताबिक नई टैक्स पॉलिसी के बाद में कई कंपनियों को साइबर हमलों में नुकसान भी हो सकता है. ये थ्रेट डेटा लीक, मास्टर डेटा में अवैध बदलाव और दूसरे लोगों की सेंध के रूप में आएंगे.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों को जीएसटी को फोकस में रखते हुए अपने आईटी आर्किटेक्चर में बदलाव करने की जरूरत है. सिक्योरिटी को मजबूत करना और सिस्टम में सिक्योरिटी कंफ्यूगरेशन लगाने की जरूरत है.

मोबाइल वॉलेट कंपनी MobiKwik के रोहन खरा के मुताबिक छोटी छोटी गलतियां भी गंभीर परिणाम के लिए काफी हैं, इसलिए इस कंपनी ने अरबों के ट्रांजैक्शन के लिए दमदार सिक्योरिटी सिस्टम लगाया है. उन्होंने कहा कि वो आने वाले साइबर खतरों का अनुमान लगाने के लिए प्रेडिक्टिव ऐनालिटिक्स यूज करते हैं.

ग्रोथ एनेब्लर के को फाउंडर और सीईओ राजीव बंदुनी ने सलाह दी है कि जीएसटी लागू होने की इस घड़ी में  विक्रेताओं और खरीदारों को ऐप्लिकेशन सर्विस प्रोवाइडर (ASP) और जीएसटी सुविधा प्रोवाइडर्स (GSP)  की इनफॉर्मशन सिक्योरिटी के बारे में बारीकी से समझने और आकलन करने की जरूरत है.

उन्होंने अगाह करते हुए कहा है कि ASP और GSP के एंड डिवाइस साइबर टेररिस्ट्स ( खतरनाक हैकर्स) का अगना निशाना हो सकता है.

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