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'GST बड़ी उपलब्ध‍ि, बैंकों की सेहत में सुधार लेकि‍न तेल की बढ़ती कीमत चुनौती'

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019 भारतीय इकोनॉमी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.  सर्वे में कहा गया है क‍ि एक्सपोर्ट सेक्टर  से इकोनॉमी को बूस्ट मिलने की उम्मीद है.

आर्थि‍क सर्वे पर मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार की प्रेस कांफ्रेंस आर्थि‍क सर्वे पर मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार की प्रेस कांफ्रेंस
विकास जोशी/बालकृष्ण
  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019 भारतीय इकोनॉमी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.  सर्वे में कहा गया है क‍ि एक्सपोर्ट सेक्टर  से इकोनॉमी को बूस्ट मिलने की उम्मीद है. सर्वे को लेकर अरविंद सुब्रहमण्यन प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं.

- इकोनॉमी हालत सुधर रही है. जीएसटी और नोटबंदी का असर खत्म हो रहा है. सरकार की तरफ से भी इसके लिए अहम कदम उठाए जा रहे हैं.

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- निर्यात भी बेहतर स्थ‍िति में आया है. इससे अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिल रही है.

- कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब है कि जीडीपी पर इसका सीधा असर पड़ेगा. इससे कमाई बढ़ने का खतरा भी पैदा होगा

- पिछले साल के मुकाबले इस साल 15 से 16 फीसदी तेल की कीमतो में बढ़ोतरी हुई है. इस चुनौती से निपटने की जरूरत है.

पॉलिसी एजेंडा

- कृष‍ि को  सहारा देने की जरूरत

- जीएसटी में सुधार करने की जरूरत और इसे स्थाई रूप देने की जरूरत होनी चाहिए.

- एयर इंडिया का निजीकरण करने की जरूरत

- मैक्रो इकोनॉमिक के दबावों से निपटना और तेल की बढ़ती कीमतों की चुनौती से निपटना

- सरकार को टीबीएस एक्शन चौथे आर को लेकर सतर्क रहना होगा . 4था आर- रिफॉर्म है.

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जीएसटी डाटा से मिली ये चीजें

- जीएसटी के बाद आयकर कलेक्शन बढ़ा है.

- नवंबर, 2016 से 18 लाख एक्स्ट्रा आयकर फाइलिंग बढ़ी है.

- फॉर्मल सेक्टर काफी बढा है. इसका आकार 7.5 करोड़ के पार है.

चुनौतियां

- जलवायु परिवर्तन की चुनौती

- वैश्व‍िकीकरण की प्र‍ितिक्र‍िया 

- ह्यूमन कैपिटल को बढ़ावा देने की चुनौती

भव‍िष्य के लिए एजेंडा

- श‍िक्षा, रोजगार, कृष‍ि पर फोकस की जरूरत

- जीएसटी परिषद का 'कॉऑपरेटिव फेडरलिजम' की तकनीक अन्य क्षेत्रों को फायदा मिलेगा.

- पहली बार विज्ञान को लेकर भी आर्थिक सर्वे में बात की गई है.  विज्ञान पर ज्यादा फोकस देने की जरूरत है. इसके लिए एक पूरा चैप्टर सर्वे में दिया गया है.

- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने का अगला कदम त्वरित न्याय मिलना है. प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी जल्दी मिले.

जीएसटी का असर

इकोनॉमिक सर्वे में जीएसटी और इसके असर को लेकर भी बात की गई है. इसमें कहा गया है कि जीएसटी की वजह से अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां खड़ी हुईं. इस नई कर व्यवस्था ने न सिर्फ सरकारी की नीतियों के सामने चुनौति पेश की, बल्क‍ि इसकी वजह से सूचना प्रसारण तकनीक के लिए भी राह मुश्क‍िल रही.  

सर्वे में कहा गया है इसका सबसे ज्यादा असर इंफोर्मल सेक्टर पर पड़ा. सरकार की तरफ से जो त्वरित निर्णय लिए गए, उनसे रेट्स कम हुए हैं. इसके साथ ही इसे लागू करने में आ रही दिक्कतों को भी दूर करने की कोशिश की गईं.

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रफ्तार कम भी हो सकती है और बढ़ भी सकती है

अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर अरविंद ने कहा कि जब हम 7 से 7.5 फीसदी की रेंज देते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि यह 7.5 फीसदी तक जाएगी ही. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार ऊपर भी जा सकती है और नीचे भी जा सकती है. फिलहाल यह कहना मुश्क‍िल है कि अर्थव्यवस्था किस तरफ जाएगी. 7 से 7.5 फीसदी के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी साबित होगी.जीएसटी और नोटबंदी का असर आने वाले समय में ना के  बराबर हो जाएगा.

निजी निवेश काफी लंबे समय तक अटका हुआ था. लेक‍िन अब यह बढ़ा है. बैंकरप्टसी कोड और दिवालिया काननू बहुत ही बड़े सुधार हैं. इनसे बैंकों की सेहत सुधर रही है. इससे निजी निवेश में बढ़ोतरी हो रही है.

शेयर बाजार की तेजी को लेकर

निवेशक सोने और सेविंग्स स्कीम में निवेश करने की बजाय शेयर बाजार में पैसे लगा रहे हैं. हालांकि इसे गंभीर स्तर पर निगरानी की जरूरत है.

कृष‍ि के सामने कई चुनौतियां

कृष‍ि में लघु और मध्य अवध‍ि की चुनौतियां हैं.  इन चुनौतियों से निपटने के लिए तंत्र तैयार करने की आवश्यकता है. ताकि किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सके. 2022 तक किसानों की आय बढ़ाने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है. यह आर्थिक सर्वे के कृष‍ि वाले चैप्टर में दिए गए हैं.

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कम हों जीएसटी टैक्स स्लैब

अगले 3 से 5 सालों के भीतर एक ही जीएसटी टैक्स स्लैब रखने पर विचार किया जा सकता है. लेक‍िन लघु अवध‍ि में जरूरत है जीएसटी को आसान बनाने की. हालांकि मौजूदा रेट्स को कम करने की जरूरत है.

निर्यात बढ़ेगा, तो रोजगार बढ़ेगा

रोजगार को बढ़ावा देना है तो एक्सपोर्ट और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर देना होगा. इसके साथ ही सेक्टर की सेहत सुधारने पर भी फोकस करना होगा.

किसानों की आयु कैसे होगी दुगुनी

किसानों की आय 2022 तक दुगुनी करने के लिए दो चीजें करनी होंगी. किसानों को कम मानसून जैसे खतरों से बचाना होगा. इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और कम समर्थन मूल्य को आगे लाना होगा.

लोगों को कृष‍ि से निकालकर किसी ओर क्षेत्र में लेकर जाना होगा. उन्होंने कहा कि किसानों की आय दुगुनी करने के लिए सरकार को कई कदम उठाने होंगे.

- बैंक‍िंग के स्तर पर बदलाव होना चाहिए. खराब सेहत वाले बैंकों का मर्जर किया जाना चाहिए और निजी कंपनियों को एंट्री देनी होगी.

- कानून व्यवस्था पर खर्च में बढ़ोतरी होनी चाहिए. हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट को न्याय व्यवस्था में बदलाव के लिए योजना तैयार करनी चाहिए.

अगले दो सालों के भीतर लागू हो जाएगी UBI

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यूनिवर्सल बेस‍िक इनकम को लेकर उन्होंने कहा कि चर्चा  चल रही है. केंद्र के साथ राज्य भी इस पर चर्चा कर रहे हैं. अगले दो सालों के भीतर कम से कम एक या दो राज्य इसे लागू कर रहे होंगे.

क्या है इकोनॉमिक सर्वे

आर्थ‍िक सर्वेक्षण अथवा इकोनॉमिक सर्वे पिछले साल बांटे गए खर्चों का लेखाजोखा तैयार करता है. इससे पता चलता है कि सरकार ने पिछले साल कहां-कहां कितना खर्च किया और बजट में की गई घोषणाओं को कितनी सफलतापूर्वक निभाया. इसके साथ ही सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि पिछले साल अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी रही.

सर्वेक्षण के जरिये इकोनॉमी को लेकर कई सुझाव भी सरकार को दिए जाते हैं. इस बार सर्वेक्षण में सुझाव कृष‍ि पर फोकस रहने की संभावना जताई जा रही है.

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