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महाभारत की लड़ाई के लिए कौन था जिम्मेदार, जानें क्या कहते हैं मुख्य किरदार

गजेन्द्र चौहन ने कहा कि मेरे हिसाब से महाभारत की लड़ाई के लिए दुर्योंधन नहीं बल्कि अहंकार जिम्मेदार है, चाहे वो धृतराष्ट्र, शकुनी हो या फिर युधिष्ठिर ही क्यों ना हो.

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जयदीप शुक्ला
  • मुंबई,
  • 22 मई 2020,
  • अपडेटेड 11:57 PM IST

टीवी पर जब से 'महाभारत' शुरू हुई है तब से इसे दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. यही कारण है कि दूरदर्शन के बाद अब इसे कलर्स चैनल पर दिखाया जा रहा है. कलर्स चैनल पर भी इसे दर्शक बहुत पसंद कर रहे हैं और अब ये स्टार भारत पर भी शुरू हो गई है. महाभारत की उस विनाशक लड़ाई के लिए ज्यादातर लोग दुर्योधन और शकुनी को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो महाभारत के उस युद्ध के लिए धृतराष्ट्र, गांधारी, द्रौपदी, युधिष्ठिर तक को जिम्मेदार मानते हैं. आजतक ने जाना कि खुद महाभारत के किरदार प्ले करने वाले एक्टर्स इसके बारे में क्या सोचते हैं?

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गजेन्द्र चौहन (युधिष्ठिर) – मेरे हिसाब से महाभारत की लड़ाई के लिए दुर्योंधन नहीं बल्कि अहंकार जिम्मेदार है. चाहे वो धृतराष्ट्र, शकुनी हो या फिर युधिष्ठिर ही क्यों ना हो. आप देखें तो युधिष्ठिर ने युद्ध क्यों किया? युधिष्ठिर ने युद्ध इसलिए किया क्योंकि वो अपने साथ हो रही नाइंसाफी को बर्दाश्त नहीं करना चाहता था तो इसमें कहीं ना कहीं अहंकार की बू आती है.

बकौल गजेंद्र- अगर आप सब कुछ छोड़ देते हैं तो रामायण हो जाती है और अगर आप अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं तो महाभारत हो जाती है. आप देखिए आजकल घर-घर में महाभारत क्यों हो रही है क्योंकि लोग अपना हक नहीं छोड़ना चाहते हैं और इस हक की लड़ाई के पीछे कहीं ना कहीं आपका अहंकार भी होता है, तो अहंकार भी कम या ज्यादा होता. जैसे आप कोई कलर देखें तो उस कलर की भी की कई सारे शेड्स होते हैं और इसी तरह से किसी में कम अहंकार होता है और किसी में ज्यादा और इसी अहंकार की वजह से महाभारत का युद्ध हुआ.

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फिरोज खान (अर्जुन)- देखिए अगर बात हम जिम्मेदारी की करें तो महाभारत का हर पात्र इस लड़ाई के लिए जिम्मेदार है और इसलिए हम किसी एक को महाभारत की लड़ाई का जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं. ये वेद व्यास ही जानते होंगे कि इसका असली जिम्मेदार कौन था, ये हक की लड़ाई थी, ये धर्म और अधर्म की लड़ाई थी इसलिए ये प्रश्न ही अपने आप में बहुत जटिल है.

अगर आप गौर करें तो देखेंगे कि इस कहानी में कितनी सारे ऐंग्ल्स हैं. तो इसलिए अगर आप दुर्योधन के दृष्टिकोण से देखें तो वो भी अपने जगह सही है. क्योंकि वो अपने पिता का बड़ा बेटा था तो इस हिसाब से उसे ही राजा होना चाहिए और दूसरी तरफ अगर आप युधिष्ठिर का दृष्टिकोण देखें तो वो राजा पांडू के बड़े बेटे थे और सभी भाइयों में सबसे बड़े थे तो उन्हें राजा बनना चाहिए था.

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गूफी पेंटल (शकुनी)- महाभारत की लड़ाई के लिए हम किसी एक इंसान को जिम्मेदार नहीं मान सकते हैं. मैं मानता हूं कि महाभारत की लड़ाई की नींव कौरवों और पांडवों के पैदा होने से पहले ही रखी जा चुकी थी. जब राजा शांतनु ने दूसरी औरत से शादी की अगर उसी वक्त भीष्म पितामह आजीवन शादी ना करने का व्रत नहीं लेते तो शायद ये महाभारत भी नहीं होती. तो मैं ये मानता हूं कि महाभारत के युद्ध में हर पात्र का अपना योगदान है.

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इसमें ना कोई पूरी तरह से ब्लैक है और ना व्हाइट बल्कि इसके पात्रों में ग्रे शेड है. आप आज के युग में ही देख लीजिए,आपको हर घर में महाभारत जैसे पात्र दिखाई दे जाएंगे. अगर आप महाभारत का गहन अध्ययन करें तो आप पाएंगे कि वेद व्यास जी ने कितनी खूबसूरती से हर किरदार को बयां किया है.

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