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गुजरात में BJP का लक्ष्य है 2014 जैसी कामयाबी, अमित शाह बनाएंगे रणनीति

नरेंद्र मोदी के 2019 में सत्ता में वापसी की राह के लिए गुजरात की भूमिका बेहद अहम रहेगी क्योंकि पिछली बार बीजेपी ने यहां से क्लीन स्वीप किया था, इस स्थिति को पार्टी बखूबी समझती है इसलिए पार्टी अभी से रणनीति बनाने में जुट गई है और वहां आयोजित चिंतन शिविर में अध्यक्ष अमित शाह भाग लेने जा रहे हैं जिसमें लोकसभा चुनाव को लेकर कई अहम विषयों पर चर्चा होगी.

बीजेपी का चिंतन शिविर बीजेपी का चिंतन शिविर
गोपी घांघर
  • अहमदाबाद,
  • 25 जून 2018,
  • अपडेटेड 8:23 PM IST

नरेंद्र मोदी के 2019 में सत्ता में वापसी की राह के लिए गुजरात की भूमिका बेहद अहम रहेगी क्योंकि पिछली बार बीजेपी ने यहां से क्लीन स्वीप किया था, इस स्थिति को पार्टी बखूबी समझती है इसलिए पार्टी अभी से रणनीति बनाने में जुट गई है और वहां आयोजित चिंतन शिविर में अध्यक्ष अमित शाह भाग लेने जा रहे हैं जिसमें लोकसभा चुनाव को लेकर कई अहम विषयों पर चर्चा होगी.

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सोमवार से दो दिन के गुजरात दौर पर हैं जिसमें वह गुजरात बीजेपी के दो दिन के चिंतन शिविर के समापन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. शिविर में वी. सतीश के साथ-साथ गुजरात बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री के अलावा सभी मंत्री भी भाग ले रहे हैं.

चुनावी रणनीति पर तैयारी

गुजरात बीजेपी ने 2019 में होने वाले अगले आम चुनाव में 26 में से 26 लोकसभा सीट का लक्ष्य अपने लिए तय किया है. पूरे 26 सीटें किस तरह हासिल की जाए उसके लिए भी इस शिविर में चिंतन होगा.

2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को गुजरात में 15 सीट मिली थीं, जबकि 2014 के चुनाव में बीजेपी ने पूरी 26 की 26 सीट झटक ली थीं. पार्टी अपना पिछला प्रदर्शन इस बार भी दोहराना चाहती है, हालांकि इस बार बीजेपी के लिए राह आसान नहीं दिख रही क्योंकि कम से कम 10 सीटें ऐसी हैं जहां पर पार्टी को सीट बचाने के लिए खासा संघर्ष करना पड़ सकता है, वहां पर सत्ता विरोधी लहर के अलावा कई अन्य कारणों का सामना करना पड़ सकता है.

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माना जा रहा है कि गुजरात बीजेपी को जिन-जिन सीटों पर हार का संकट दिख रहा है, वहां पर वह अपने उम्मीदवार को बदलने का दांव चल सकती है. चिंतन शिविर में पार्टी उम्मीदवार बदलने को चर्चा करेगी.

आडवाणी का कटेगा टिकट!

लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी वास्तविकता और लक्ष्यांक के बीच मंथन के जरिए सेतु बना रही है. गुजरात की ऐसी 10 सीट को लेकर भी मंथन होगा, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण लालकृष्ण आडवाणी की सीट रहेगी क्योंकि आडवाणी अब 90 के करीब पहुंच चुके हैं और ऐसी स्थिति में क्या उन्हें टिकट दिया जाना चाहिए या फिर उनकी जगह पर किसी और को टिकट दिया जाए.

इसी तरह अभिनेता से नेता बने परेश रावल जो अब खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते, तो वहीं गुजरात में दलितों पर बढ़ते अत्याचार के मामले और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी के सामने बीजेपी को मजबूत दलित नेता खड़ा करना होगा.

पाटन से सांसद लीलाधर वाघेला जो अपने बेटे के कांग्रेस का दामन थामने के बाद लगातार पार्टी विरोधी बयान दे रहे हैं, वहीं पोरबंदर से सांसद विट्ठल रादडिया जो इन दिनों काफी बीमार चल रहे हैं को फिर से टिकट दिए जाने पर विचार किए जाने की संभावना है.

दूसरी ओर, सौराष्ट्र में पाटीदार बहुल क्षेत्रों में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पाटीदार जाति का वर्चस्व देखने मिला. 2017 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव के नतिजों पर नजर डालें तो सौराष्ट्र में बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. इसका असर इस बार 5 लोकसभा चुनाव सीटों पर दिख सकता है.

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नरेंद्र मोदी के फिर से सत्ता में लौटने के लिए जरुरी है कि बीजेपी गुजरात में 2014 वाला परिणाम दोहराए, ऐसे में पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह का खतरा लोना नहीं चाहती.

चिंतन शिविर में अमित शाह की उपस्थिति में माइक्रो लेवल प्लानिंग के जरिए इन सीटों पर आगे की रणनीति और संभावित उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा होगी.

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