
रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने शनिवार को रेल में सफर कर रही एक लड़की का ट्वीट पढ़कर रेल अधिकारियों को तुरंत कारवाई का निर्देश दिया. कारवाई के बाद युवती यात्री को उसकी आरक्षित सीट मिल गई और मनचलों से पीछा छूटा.
पुलिस के अनुसार, पटना से नई दिल्ली जा रही श्रमजीवी एक्सप्रेस के कोच नंबर एस-11 में सवार एक युवती को जब कुछ मनचलों ने छेड़ा तो उसने दिलेरी दिखाते हुए अपने मोबाइल से ट्वीट कर इसकी शिकायत सीधे रेलमंत्री और रेल मंत्रालय से कर दी.
दानापुर रेल मंडल के प्रवक्ता संदीप कुमार सिंह ने बताया कि रेल मंत्रालय से आई सूचना के बाद ट्रेन को आरा में रोककर शिकायत की जांच कराई की गई और पीड़ित युवती को उसकी आरक्षित सीट उपलब्ध कराई गई.
आरा रेल थाना के प्रभारी परशुराम सिंह ने बताया कि लखनऊ में आयोजित एक प्रतियोगिता परीक्षा के कारण ट्रेन में परीक्षार्थियों की काफी भीड़ थी. एस-11 बोगी में भी बिना आरक्षण वाले कई यात्री घुस गए. सफर के दौरान बोगी में कुछ मनचले युवक युवती की सीट पर बैठ गए और उसके साथ छेड़छाड़ का प्रयास करने लगे. युवती के विरोध के बावजूद मनचले जब नहीं माने तब युवती ने अपने मोबाइल से ट्वीट कर इसकी शिकायत सीधे रेलमंत्री और रेल मंत्रालय से कर दी.
उन्होंने कहा कि आरा में ट्रेन के रुकते ही आरोपी युवक फरार हो गए. उस बोगी से गैर आरक्षण वाले सभी यात्रियों को उतार दिया गया, उसके बाद ट्रेन को रवाना किया गया. इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है.
महिला यात्री को भी मिली थी मदद
इससे पहले भी कई मौकों पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु को ट्वीट के जरिए मदद मांगने पर तुरंत कदम उठाए गए हैं. सोशल मीडिया पर सुरेश प्रभु की इस पहल को लोग काफई सराह रहे हैं. महाराष्ट्र में एक ट्रेन में अकेले यात्रा कर रही एक महिला यात्री को उस समय अधिकारियों की तत्काल सहायता मिली जब उसने रेल मंत्री सुरेश प्रभु के ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट कर मदद की मांग की. उस महिला यात्री ने ट्वीट किया, ‘प्लीज ट्रेन नंबर 18030 में मदद करें. शेगांव पर एक पुरुष यात्री मुझे परेशान कर रहा है. मैं ट्रेन में हूं और डरी हुई हूं.’ मध्य रेलवे के मुख्य पीआरओ नरेंद्र पाटिल ने बताया कि एक वरिष्ठ अधिकारी वेद प्रकाश ने तुरंत ट्वीट देखा और महिला की मदद के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए उनसे संपर्क किया. उन्होंने बताया कि जब 40 मिनट में ट्रेन भुसावल रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो आरपीएफ जवानों ने महिला की मदद की.
बच्चे के लिए ट्रेन में पहुंचाया गया दूध
इससे पहले भी लेट ट्रेन में बच्चे को दूध नहीं मिला तो पिता ने ट्विटर का सहारा लिया. 10 दिसंबर को मण्डुवाडीह-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस से सत्येन्द्र यादव अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे. ट्रेन लेट चल रही थी और जगह-जगह रुक रुककर चल रही थी. ऐसे में सत्येंद्र के बच्चे ने दूध के लिए रोना शुरू कर दिया. 18 महीने के बच्चे का रोना सुनकर सत्येंद्र यादव और उनकी पत्नी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था.
ऐसे में सत्येंद्र यादव ने रेलमंत्री को ट्वीट करके कहा कि ‘ट्रेन काफी लेट है, मेरे 18 महीने के बेटे को दूध चाहिए.' ट्वीट मिलते ही रेलमंत्री ने इसके उत्तर में यात्रियों का फोन नम्बर मांगा और आवश्यक व्यवस्था का आश्वासन दिया गया. इस पर सत्येंद्र यादव ने ट्रेन में सवार अपने भाई का मोबाइल नंबर दिया. रेल मंत्रालय ने महाप्रबन्धक उत्तर मध्य रेलवे एवं मण्डल रेल प्रबन्धक इलाहाबाद मण्डल को रेलयात्री की समस्या निदान करने का निर्देश दिया. इसके बाद रेल प्रशासन हरकत में आया और गाड़ी की पोजीशन चेक करने के बाद यात्री को ट्वीट करके कानपुर में आवश्यक व्यवस्था किये जाने की सूचना दी गई.
इनपुट...IANS.