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ये सच है कि मनुष्य चाहे कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो लेकिन जब तक उसे एक सही गुरु नहीं मिलता, वह जीवन में सफलता का स्वाद नहीं चख सकता. यहां हम बात कर रहे हैं हिमा दास के कोच निपोन दास की.
IAAF वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप की महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतने वाली हिमा ने कभी एथलिट बनने के बारे में नहीं सोचा था. वह लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं. लेकिन फिर उन्हें स्थानीय कोच ने सलाह दी कि उन्हें एथलेटिक्स में अपना करियर बनाना चाहिए. इसके बाद उन्होंने किस्मत आजमाने की सोची और आज वह शीर्ष एथलीटों की कतार में खड़ी हैं.
फिर एक बार हिमा पर उनके कोच निपॉन की नजर उस वक्त पड़ी जब वह 'स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर' के डायेरक्टर के साथ बैठे थे. उस वक्त उन्होंने देखा एक लड़की ने काफी सस्ते स्पाइक्स पहने हुए थे, लेकिन फिर भी उसने 100 और 200 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया. आपको बता दें, उनके कोच ने कहा- हिमा हवा की तरह दौड़ रही थी. मैंने इतनी कम उम्र में ऐसी प्रतिभा किसी के अंदर नहीं देखी थी.
जब कोच ने मनाया घरवालों को..
निपोन जानते थे कि हिमा एक बेहतरीन एथलीट बन सकती है, वहीं उनकी तैयारी में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए. ऐसे में निपोन ने उन्हें गांव से 140 किलोमीटर दूर गुवाहाटी में शिफ्ट होने के लिए कहा ताकि वह अपने खेल पर पूरा फोकस कर सके. हालांकि हिमा के पिता धान की खेती करते हैं और वह उनकी सबसे छोटी बेटी है. ऐसे में माता- पिता अपनी बेटी को खुद से दूर करने के लिए राजी नहीं हुए. लेकिन बाद काफी जद्दोजहद के बाद कोच ने परिवार वालों को मना ही लिया. जिसके बाद कोच ने उन्हें ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी.
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आपको बता दें, कोच निपोन दास पिछले साल जनवरी में हिमा से जुड़े थे और उनका (हिमा का) आत्मविश्वास ही उसकी सफलता का आधार बना. वहीं उनके कोच का कहना है कि वह हिमा की दौड़ को लेकर चिंतित नहीं थे. क्योंकि मैं जानता था कि उसकी असली दौड़ अंतिम 80 मीटर में शुरू होती है.
आपको बता दें, गुवाहटी आने के बाद कोच ने हिमा के लिए सरसाजई स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास एक किराए पर रहने वाले घर में रहने की व्यवस्था की. जिसके बाद उन्होंने हिमा के लिए अधिकारियों से राज्य अकादमी में शामिल होने के लिए रिक्वेस्ट की जो मुक्केबाजी और फुटबॉल में मशहूर था. वहीं "एथलेटिक्स के लिए कोई अलग विंग नहीं था, लेकिन हिमा के बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें अकादमी का हिस्सा बना लिया गया.
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जैसे ही हिमा ने ये दौड़ जीतकर इतिहास रचा. उन्होंने अपने कोच का ही शुक्रिया सबसे पहले किया. निपॉन शुरू से ही हिमा को गाइड करते आए हैं. इंडियन एक्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार निपॉन ने कहा- 'मैं हमेशा हिमा को कहता था कि 'बड़े सपने' के बारे में सोचो. क्योंकि कुछ ही लोगों को भगवान के द्वारा मिली हुई ये बेहतरीन प्रतिभा नसीब होती है. कोच ने बताया मेरा सपना है कि वह एशियन गेम्स की रिले टीम का हिस्सा बनें.
असम के एक साधारण किसान की बेटी हिमा आज खेल जगत की दुनिया में छा गई हैं. आज वह अपने नाम से जानी जा रही हैं. अपनी बेटी की कामयाबी को देखते हुए काफी खुश हैं. उन्होंने कहा- हम चाहते हैं हमारी बेटी देश के लिए और गोल्ड मेडल जीते. वहीं अपनी जीत पर हिमा ने कहा- आज मेरा सपना पूरा हो गया है. मुझे खुशी है कि मैंने 51.46 सेकेंड के समय के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया.