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डोकलाम से पीछे हटने से सीमा पर बढ़ जाएगा ड्रैगन का दबदबा, चीनी साजिश में फंस जाएंगे ये 7 राज्य

ध्यान देने बात ये है कि 1950 के बाद 27 बार चीन ने सिक्किम और अरुणाचल पर नजर उठाई है. अगर चीन भूटान पर कब्जा करता है, तो खतरा पूरे नॉर्थ ईस्ट के राज्यों पर आ जाएगा.

भूटान पर है चीन की नजर भूटान पर है चीन की नजर
नंदलाल शर्मा
  • नई दिल्ली ,
  • 24 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 7:36 AM IST

1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया और 2017 में भूटान को दूसरा तिब्बत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. तिब्बत की तुलना में भूटान सिर्फ कमजोर ही नहीं है बल्कि हर तरह से छोटा है, लेकिन सामरिक तौर पर भारत के लिये तिब्बत से कहीं ज्यादा बड़ा खतरा भूटान पर ड्रैगन की नजर का होना है. तिब्बत की सीमा कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम से लेकर अरुणाचल तक से मिलती है.

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भूटान पर कब्जे से नॉर्थ ईस्ट पर खतरा

तिब्बत का क्षेत्रफल 12 लाख 20 हजार वर्ग किलोमीटर है, तो भूटान का क्षेत्रफल 38000 वर्ग किमी है. तिब्बत की जनसंख्या 27 लाख 70 हजार है, तो भूटान की जनसंख्या 7 लाख 50 हजार है. ध्यान देने बात ये है कि 1950 के बाद 27 बार चीन ने सिक्किम और अरुणाचल पर नजर उठाई है. अगर चीन भूटान पर कब्जा करता है, तो खतरा पूरे नॉर्थ ईस्ट के राज्यों पर आ जाएगा.

नक्शे में डोकलाम की भौगोलिक स्थिति को परखें, तो वहां से चंद कदम भारत की ओर बढ़ाने में चीन को कोई दिक्कत नहीं होगी. क्योंकि डोकलाम ऊंचाई पर है. जहां से सिक्किम और बंगाल के बीच से निकलने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 31 तक चीनी फौज कभी भी पहुंच सकती है. ऐसे में नॉर्थ ईस्ट के सातों राज्यों पर संकट आ जाएगा.

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भूटान को दूसरा तिब्बत बना देगा चीन

बता दें कि रॉयल भूटान आर्मी के विरोध के बावजूद चीन ने डोकलाम में सड़क निर्माण जारी रखा. इसके बाद भारतीय सैनिकों ने विरोध किया तो चीनी सेना ने छोटी चौकियां नष्ट कर दी. भारत और भूटान सेना से गतिरोध के बावजूद चीनी आर्मी डोकलाम के पास निर्माण सामग्री पहुंचा रही है. ऐसे में साफ है कि भारत के डोकलाम से पीछे हटने पर चीन भूटान को दूसरा तिब्बत बना देगा.

तिब्बत को लूट रहा है चीन

दुनिया में सबसे ऊंची जगह तिब्बत में चीन ने सड़क निर्माण कर लिया है. खनिजों को जमकर दोहन कर रहा है और 70 प्रतिशत जंगल साफ कर दिया है. तिब्बत को सैनिक अड्डा बना दिया है. न्यूक्लियर अस्त्रों के रेडियोधर्मी कचरे को निपटाने का कूड़े दान बना दिया है. तिब्बत से निकलने वाली सतलुज, सिंधु, ब्रह्मपुत्र और इरावदी नदी पर कब्जा कर लिया है. चीन की यही विस्तारवादी नीति भारत के लिए खतरे की घंटी है.

ड्रैगन ने नष्ट कर दी तिब्बत की संस्कृति

यही नहीं चीन ने तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत को भी नष्ट कर दिया है. 1950 में तिब्बत में 6 हजार मठ और मंदिर थे लेकिन अब सिर्फ 60 मठ बचे हैं. धार्मिक महत्व की कलाकृतियां, दुर्लभ पांडुलिपी, प्राचीन थंका चित्र विश्व बाजार में बेच अरबों कमा लिया है.

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तिब्बत में खनिजों का भंडार

तिब्बत में चीन की लूट ऐसे समझा जा सकता है कि दुनिया में जो अमूल्य खनिज संपदा पाई जाती है उसका डेढ़ गुना सिर्फ तिब्बत में मौजूद है. जिस पर चीन ने कब्जा कर लिया है. तिब्बत में एजबेस्टस, कोबाल्ट, तांबा, हीरा, सोना, चांदी, रेडियम. पारा, टाइटेनियम, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम का भंडार बेशुमार है. इसी दौर में चीन ने तिब्बत की विकसित खेती प्रणाली को भी खत्म कर दिया है. इससे तीन लाख से ज्यादा तिब्बती भूख से मर गए.

चीन लगातार इस बात की धमकी दे रहा है कि भारत डोकलाम से अपनी सेना को वापस बुलाए, लेकिन ऐसा होते ही चीन डोकलाम पर अपनी पकड़ मजबूत बना लेगा. चीन इस मसले पर पीछे हटने को तैयार नहीं है, वो लगातार डोकलाम पर अपना दावा जता रहा है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन से हटाने को कहा था, जिसे ड्रैगन ने फैंटेसी करार दिया. ऐसे में इस सैन्य गतिरोध के और बढ़ने की आशंका है.

 

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