
इस भारी भरकम हेलिकॉप्टर को हाल ही में उत्तर-पूर्व में शामिल किया गया था और इसका उपयोग निकट भविष्य में वजनी चीजों को ढोने और सैनिकों के स्थानांतरण के लिए किया जाएगा.
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चिनूक को सबसे पहले चंडीगढ़ एयर बेस पर पिछले साल मार्च में शामिल किया गया था और सियाचिन ग्लेशियर पर मिलिट्री कैंप समेत उत्तरी क्षेत्र में परिचालन के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था.चीन की सीमा पर सैनिकों और सामग्री की आपूर्ति के लिए चिनूक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा सकेगा, जहां भारतीय सेना की चार टुकड़ियों को किसी भी दुस्साहसियों से बचाव के लिए तैनात किया गया है.
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इस साल गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भारतीय वायुसेना की झांकी में राफेल लड़ाकू विमान से लेकर एयरक्राफ्ट चिनूक भी शामिल किया गया था.