
भारत के निकट समुद्र क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह से उसकी नजदीकी के बीच भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अरब सागर में नौसैनिक अभ्यास का मुआयना किया. इस नौसैनिक अभ्यास में विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य ने भी हिस्सा लिया.
भारत की नौसैनिक शक्ति को दर्शाने वाला ये अभ्यास 8 और 9 जनवरी को हुआ. रक्षा मंत्री की मौजूदगी में इस नौसैनिक अभ्यास में आईएनएस विक्रमादित्य समेत दस से अधिक युद्धपोतों, तीन पनडुब्बियों और नौसेना के अनेक विमानों ने हिस्सा लिया. भारत के पश्चिमी समुद्री तट पर हुए इस अभ्यास में भारतीय नौसेना ने अपनी क्षमताओं का जमकर प्रदर्शन किया.
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले आईएनएस कोलकाता का मुआयना किया. आईएनएस कोलकाता स्वदेश में निर्मित कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर्स श्रेणी का पहला पोत है. रक्षा मंत्री इसके बाद आईएनएस विक्रमादित्य के वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन को नजदीक से देखने के लिए इस पोत पर 8 जनवरी को पूरी रात रूकीं. इसके लिए नौसेना की ओर से ऐसा अभ्यास किया गया जिसमें विमानवाहक पोत को कई तरफ से चुनौतियों का सामना दिखाया गया.
दो दिन तक चले भारतीय नौसेना के अभ्यास में एयर इंटरसेप्शन्स, मिसाइल, गन और राकेट फायरिंग, जहाज से जहाज में आपूर्ति, रात्रि में उड़ान, पनडुब्बी हमले से बचने के ऑपरेशन आदि का प्रदर्शन किया गया. भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े ने अपनी युद्ध क्षमताओं को पूरे कौशल के साथ दिखाया.
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय नौसेना की तैयारियों को लेकर कहा, 'पश्चिमी बेड़े के कौशल को देखकर मैं आश्वस्त हूं कि भारतीय नौसेना किसी भी चुनौती से देश की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है.'
रक्षा मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों से मंत्रणा करने के साथ पोत पर तैनात नौसैनिकों से भी संवाद किया. रक्षा मंत्री मंगलवार को पोत से ही नौसेना के हेलीकॉप्टर के जरिए आईएनएस हंस, गोवा के लिए रवाना हो गईं.
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