
जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने को गुरुवार को चार महीने पूरे हो गए. इस दौरान घाटी की जमीनी स्थिति बदल गई. जम्मू और कश्मीर अब राज्य नहीं रहा, केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील हो चुका है.
परीक्षा दस्तावेज अपलोड करने में मुश्किल
चार महीने बीत जाने के बाद भी घाटी के आम लोगों को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है. इंटरनेट सेवाओं का बहाल नहीं होना भी उनमें से एक है.
36 वर्षीय उमर को श्रीनगर में इंटरनेट कनेक्शन के लिए जगह-जगह भटकना पड़ रहा है. उमर की छोटी बहन को मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए 'राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा' (NEET) में हिस्सा लेना है. इसके लिए उमर को बहन के दस्तावेज को अपलोड करना है. परीक्षा में बैठने के लिए ऐसा करना अनिवार्य है.
यह परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सोमवार को फॉर्म जारी किए. घाटी में उमर की बहन के जैसे हजारों अभ्यर्थी हैं जिन्हें इंटरनेट सेवा के बंद होने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
इंटरनेट ठप होने से तमाम वर्गों पर असर
उमर ने कहा, 'निर्देशों की लंबी सूची है और कई दस्तावेज अपलोड करने होते हैं. कोई ये कैसे कर सकता है? उन्होंने डीसी ऑफिस में एक डेस्क रखा हुआ है. वहां वो पेन ड्राइव ले लेते हैं और अभ्यर्थियों को बताते हैं कि वो अपलोड कर देंगे. एक दिन में वो 100 लोगों का डेटा लेते हैं. ये बड़ी परेशानी है.' इंटरनेट ठप होने से घाटी में समाज के तमाम वर्गों पर असर पड़ा है.
श्रीनगर के लघु श्रेणी के उद्यमी ज़ुबेर अहमद कहते हैं कि उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अब तकनीकी दिक्कतें भी पेश आ रही हैं. ज़ुबेर कहते हैं, 'हमें अपना जीएसटी फाइल करना है लेकिन जो हालात हैं उनमें हम ऐसा नहीं कर सकते.'
सरकार की ओर से ये हैं संकेत
सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि इस मुद्दे पर जल्दी ही कोई फैसला लिया जा सकता है. जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल जी सी मुर्मु ने कहा, 'हम इसकी (इंटरनेट बैन) की समीक्षा कर रहे हैं. जैसे ही ये (स्थिति) सामान्य होती है हम इसे चरणबद्ध ढंग से करेंगे. हम इस पर अपने प्रशासन से बात कर चुके हैं और हम इस पर काम कर रहे हैं.'
उपराज्यपाल उत्तरी कश्मीर के बारामुला के शीरी में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में नए पुलिस रिक्रूट्स की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण करने के बाद बोल रहे थे.
बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार की ओर से जम्मू और कश्मीर पर बड़ा एलान करने के बाद तमाम तरह की बंदिशें लगाई गई थीं. इनमें लोगों की आवाजाही पर रोक के साथ संचार के सभी तरह के माध्यमों की सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था. विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं और एक्टिविस्ट्स समेत करीब 5000 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
इनमें से अधिकतर अब हिरासत में हैं या नजरबंद हैं. इस दौरान चरणबद्ध ढंग से लोगों की आवाजाही पर रोक हटा ली गई. साथ ही मोबाइल फोन सेवाएं भी बहाल कर दी गईं. लेकिन इंटरनेट सेवा अब भी निलंबित है.