
जम्मू-कश्मीर से राज्य सरकार के पतन के दूसरे दिन श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर गलांदर के निकट न्यू बाईपास पाम्पोर के पास आतंकवादियों ने पुलिस की गाड़ी पर हमला बोल दिया जिसमें एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई, जबकि 2 घायल हो गए.
पुलिस के अनुसार आतंकवादियों ने पंपोर इलाके में भारतीय रिजर्व पुलिस की 17वीं बटालियन की गाड़ी पर निशाना बनाया और उस पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जबकि हमलावरों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया.
कॉन्स्टेबल तनवीर शहीद
हालांकि हमले में घायल कॉन्स्टेबल तनवीर शहीद हो गए हैं. घायल तनवीर को आनन-फानन में बीबी कैंट सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां डॉक्टरों ने उनका तुरंत ऑपरेशन भी किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.
पुलिस की इस गाड़ी में कई पुलिसकर्मी बैठे हुए थे. आतंकी हमले में 3 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें एक की बाद में मौत हो गई.
कल मारे गए 3 आतंकी
इससे पहले कल राज्य के पुलवामा के त्राल में सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया. त्राल के हयाना में हुए इस एनकाउंटर में एक जवान और एक स्थानीय नागरिक घायल भी हो गया था. सुरक्षाबलों ने आतंकियों के छुपे होने की खुफिया जानकारी के बाद ऑपरेशन शुरू किया था.
मुठभेड़ में 42 राष्ट्रीय राइफल का एक जवान गोली लगने से जख्मी हो गया जिसे बेस अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करा दिया गया था. साथ ही जावेद अहमद नाम का एक स्थानीय युवक भी गोलीबारी की चपेट में आ गया. राज्य के डीजीपी एसपी वैद ने आंतकियों के मारे जाने की पुष्टि की.
सूत्रों के मुताबिक आतंकी आकिब हीनास के घर में छुपे हुए थे. आकिब को कुछ साल पहले ही एनकाउंटर में मार दिया गया था.
रमजान के दौरान लागू सीजफायर को बीते सप्ताह खत्म कर दिया गया था. इसके बाद से घाटी में सुरक्षाबल फिर से सक्रिय हो गए हैं.
इससे पहले जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार के इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा की ओर से की गई सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने हस्ताक्षर कर दिए और इसके साथ ही आठवीं बार राज्य में सत्ता की कमान राज्यपाल के हाथों में आ गई.
यह इत्तेफाक है कि इन 8 मौकों पर राज्यपाल शासन के लिए मुफ्ती परिवार ही गवाह बना. पिछले सात बार राज्यपाल का राज होने की वजह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मुफ्ती मोहम्मद सईद ही रहे जबकि आठवीं बार यह ठीकरा उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती के सिर फूटा.