
बीजेपी नेता और राज्यसभा के नेता अरुण जेटली संसद के महत्वपूर्ण मॉनसून सत्र में शामिल नहीं हो पाएंगे. ऐसे में बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है कि राज्यसभा में उनकी जगह किस नेता को दी जाए.
मॉनसून सत्र 18 जुलाई को शुरू हो रहा है और 10 अगस्त को खत्म हो रहा है. अरुण जेटली की गत 14 मई को एम्स में सफलतापूर्वक किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी की गई थी, जिसके बाद वह डॉक्टरों की सलाह पर आराम कर रहे हैं.
इसलिए अब भारतीय जनता पार्टी को राज्यसभा में नेतृत्व के लिए उनके जैसे ही किसी कद्दावर, जानकार नेता का चयन करना है. जेटली के पास एक और बड़ी जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय की थी, जिसका प्रभार फिलहाल रेल मंत्री पीयूष गोयल के पास है.
गौरतलब है कि इस समय राज्यसभा के नेता की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण मसलों पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करेगा. देश में अफवाहों के आधार पर मॉब लिंचिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी की सरकार गिर चुकी है और कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं में तेजी आई है.
यही नहीं, सरकार में फिलहाल जेटली की क्या भूमिका है, इस पर भी विपक्ष सवाल उठाएगा. एक विपक्षी नेता ने आजतक-इंडिया टुडे से कहा, 'सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश का वित्त मंत्री कौन है? जेटली बिना प्रभार के मंत्री हैं और गोयल प्रभार के साथ.'
राज्यसभा के नेता की तलाश
सरकार मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने की कोशिश करेगी. सरकार राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, हालांकि उसके पास इस सदन में पर्याप्त संख्या नहीं है. राज्यसभा में विपक्ष के सांसदों की संख्या एनडीए से ज्यादा है.
बताया जा रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले हफ्ते जेटली इस बारे में चर्चा की है कि राज्यसभा में उनकी जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए. सूत्रों के अनुसार, एक प्रस्तावित नाम केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का भी है. हालांकि विपक्ष में गुलाम नबी आजाद, पी चिदंबरम, मनमोहन सिंह, अम्बिका सोनी, शरद यादव जैसे वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं के सामने गोयल शायद उपयुक्त नेता न साबित हों.
सूत्रों के मुताबिक ऐसी कई विवशताओं को देखते हुए बीजेपी आईटी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को अस्थायी तौर पर अरुण जेटली का विकल्प बना सकती है. एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, 'राज्यसभा के सभी बीजेपी नेताओं में मानसून सत्र को संभालने के लिए रविशंकर प्रसाद सबसे काबिल व्यक्ति हैं, क्योंकि इस सत्र में विपक्ष यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश करेगी कि कोई कामकाज न होने पाए.'
विपक्ष भी जेटली की अनुपस्थिति का फायदा उठाने को तैयार दिखता है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'जेटली विपक्ष के सामने तर्क के साथ आते हैं और सरकार के पक्ष को किसी सेल्समैन की तरह पेश करते हैं. कोई और आया तो यह विपक्ष के लिए फायदे की बात ही होगी.'