
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला का आज (गुरुवार) 114वां जन्मदिन है. इस मौके पर श्रीनगर के नसीमबाग इलाके में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के मकबरे के पास किसी आयोजन की इजाजत नहीं दी गई. शेख अब्दुल्ला के 8 सितंबर 1982 को निधन के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास ये पहला मौका है जब उनके जन्मदिन पर फातिहा पढ़ने (विशेष दुआ) की इजाज़त नहीं दी गई.
गुरुवार को सुबह से ही नसीमबाग इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती देखी गई. साथ ही शेख अब्दुल्ला की कब्र पर जाने वाले रास्ते को कंटीले तारों से घेर दिया गया और लोगों के उस तरफ जाने पर रोक लगा दी गई. ये ऐहतियाती कदम इसलिए उठाया गया जिससे नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में वहीं इकट्ठा ना हो सकें.
शेख अब्दुल्ला के बेटे डॉ फारुक अब्दुल्ला और पोते उमर अब्दुल्ला भी जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री पद को संभाल चुके हैं. 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने के बाद से ही डॉ फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला हिरासत में हैं. अब्दुल्ला परिवार के सदस्यों के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के तमाम नेता हर साल शेख अब्दुल्ला के जन्मदिन पर उनकी कब्र पर आकर उन्हें याद करते रहे हैं.
श्रीनगर से रऊफ़ अहमद रोशनगार के इनपुट्स के साथ