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जस्टिस अकील कुरैशी की नियुक्ति के मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा है कि इस मामले को जस्टिस बोबड़े की अगुवाई वाली पीठ के सामने मेंशन किया जाए. अब इस मामले की सुनवाई जस्टिस बोबडे की अगुवाई वाली पीठ करेगी. इस मामले को अब 12 नवंबर को कोर्ट-2 के सामने मेंशन किया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने कहा है कि इस मामले में हमें आखिरी हस्ताक्षर का इंतजार है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई अगली बुधवार को करेगा. आज की मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि कोर्ट को केंद्र सरकार निर्देश दे कि जजों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश बाद एक तय समय के भीतर नियुक्त कर दिया जाए.
बता दें कि सितंबर में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाई कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस अकील कुरैशी को मध्य प्रदेश की बजाय त्रिपुरा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की थी. इससे पहले कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति अकील कुरैशी को पदोन्नति देकर मप्र उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाने का निर्णय लिया था.
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा था कि कॉलेजियम का निर्णय शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा. लेकिन कानून मंत्रालय ने कानूनी और तकनीकी आपत्तियों के साथ उनकी फाइल पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को वापस भेज दी थी.
वकील ने ये आरोप लगाए थे
गुजरात उच्च न्यायालय एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यतिन ओझा ने कथित रूप से कहा था कि न्यायमूर्ति कुरैशी को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने 2010 में मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह को पुलिस हिरासत में देने का आदेश पारित किया था. जस्टिस अकील कुरैशी ने ही फर्जी मुठभेड़ मामले में तब के गुजरात के गृह मंत्री अमित शाह को गुजरात से तड़ीपार का आदेश दिया था.