
आईएनएक्स मीडिया मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री नेता पी. चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. दरअसल, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया है कि 98 हजार करोड़ के इंडियाबुल्स स्कैम में पी चिदंबरम को भी फायदा पहुंचा है. इसके साथ ही उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला करार दिया है. लेकिन सवाल है कि यह मामला है क्या.. आइए विस्तार से समझते हैं...
क्या है IHFL का मामला
कुछ महीनों पहले इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) के चेयरमैन और निदेशकों पर जनता के 98 हजार करोड़ रुपये के फंड में हेराफेरी के आरोप लगे थे. यह आरोप कानूनी फर्म मानाजियम जुरिस ने लगाया था. हालांकि बीते दिनों इस फर्म ने झूठे आरोप के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग ली. मानाजियम जुरिस ने अपने माफीनामे में कहा था, 'सभी झूठी और तथ्यात्मक रूप से गलत शिकायतों को वापस ले लिया गया है, जो कि मेरे कार्यालय की ओर से तैयार की गई थी और दाखिल की गई थी.'
इसमें आगे लिखा गया, 'हम भविष्य में कभी भी इस तरह की गतिविधियों में लिप्त नहीं होने का आश्वासन देते हैं कि ना तो मैं और ना ही मेरी फर्म इंडियाबुल्स समूह या उसकी कंपनियों के खिलाफ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भविष्य में कोई मुकदमा दाखिल करेगी.' हालांकि इसके बावजूद एक बार फिर इंडियाबुल्स के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है. इस याचिका में भी कंपनी पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. बता दें कि 80 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज में डूबी हुई इंडियाबुल्स समूह रियल एस्टेट, शेयर बाजार, बैंकिंग और हाउसिंग लोन के कारोबार में सक्रिय है.
लंबे समय से मुखर हैं स्वामी
इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और उसके सहयोगियों पर वित्तीय घोटाले मामले को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी लंबे समय से मुखर हैं. बीते दिनों सुब्रमण्यम स्वामी ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया था. इस लेटर में दावा किया गया कि इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस जानबूझ कर वित्तीय पतन और दिवालियापन की तरफ बढ़ रही है, जो रियल एस्टेट, बैंकिंग, शेयर बाजार आदि में भ्रष्टाचार का मसला है. इसमें 1 लाख करोड़ रुपये की चपत निवेशकों को और राष्ट्रीय हाउसिंग फाइनेंस बोर्ड को लगी है.
सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक इंडियाबुल्स ने 100 से अधिक शेल कंपनियां बनाई, जिन्होंने NHB से कर्ज लिया. फिर इस कर्ज को महाराष्ट्र, दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु और चेन्नई की कई रीयल एस्टेट कंपनियों को दे दिया गया. इस कर्ज का दायरा 30 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये का था.