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दशहरे पर यदि कुल्लू नहीं जा पा रहे तो यहां जानें उसकी खास बातें

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा सबसे अलग और अनोखे अंदाज में मनाया जाता है. यहां का दशहरा पर्व परंपरा, रीतिरिवाज और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है.

कुल्लू का दशहरा होता है सबसे अलग कुल्लू का दशहरा होता है सबसे अलग
स्वाति पांडे
  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

दशहरा वैसे तो पूरे देश में धूमधाम से मचाया जाता है लेकिन भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं जहां का दशहरा बिल्कुल अलग होता है. ऐसी ही जगहों में एक है हिमाचल प्रदेश का कुल्लू.

कुल्लू का दशहरा पर्व परंपरा, रीतिरिवाज और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा सबसे अलग और अनोखे अंदाज में मनाया जाता है. यहां इस त्योहार को 'दशमी' कहते हैं. आश्विन महीने की दसवीं तारीख को इसकी शुरुआत होती है. जब पूरे भारत में विजयदशमी की समाप्ति होती है उस दिन से कुल्लू की घाटी में इस उत्सव का रंग और भी अधिक बढ़ने लगता है.

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रथयात्रा: इस समय रथयात्रा का आयोजन भी होता है. रथ में रघुनाथजी और सीता व हिडिंबाजी की प्रतिमाओं को रखा जाता है. रथ को एक से दूसरी जगह ले जाया जाता है, जहां यह रथ 6 दिन तक ठहरता है. इस दौरान छोटे-छोटे जुलूसों का सौंदर्य देखते ही बनता है.

मोहल्ला उत्सव का आयोजन: उत्सव के 6ठें दिन सभी देवी-देवता इकट्ठे आकर मिलते हैं जिसे 'मोहल्ला' कहते हैं. रघुनाथजी के इस पड़ाव पर सारी रातलोगों का नाच-गाना चलता है. 7वें दिन रथ को व्यास नदी के किनारे ले जाया जाता है, जहां लंकादहन का आयोजन होता है.


यज्ञ का न्योता: कुल्लू के दशहरे में आश्विन महीने के पहले 15 दिनों में राजा सभी देवी-देवताओं को धालपुर घाटी में रघुनाथजी के सम्मान में यज्ञ करने के लिए न्योता देते हैं. 100 से ज्यादा देवी-देवताओं को रंगबिरंगी सजी हुई पालकियों में बैठाया जाता है. इस उत्सव के पहले दिन दशहरे की देवी, मनाली की हिडिंबा कुल्लू आती हैं. राजघराने के सब सदस्य देवी का आशीर्वाद लेने आते हैं.

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निराली छटा बिखेरता उत्सव : इसके पश्चात रथ को पुन: उसके स्थान पर लाया जाता है और रघुनाथजी को रघुनाथपुर के मंदिर में पुन:स्थापित किया जाता है. इस तरह विश्वविख्यात कुल्लू का दशहरा हर्षोल्लास के साथ संपूर्ण होता है. कुल्लू नगर में देवता रघुनाथजी की वंदना से दशहरे के उत्सव का आरंभ करते हैं.

दशहरा पर्व भारत में ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर विश्व के अनेक देशों में उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है. भारत में विजयदशमी का पर्व देश के कोने-कोने में मनाया जाता है. भारत के ऐसे अनेक स्थान हैं, जहां दशहरे की धूम देखते ही बनती है. कुल्लू के साथ-साथ मैसूर का दशहरा भी काफी प्रसिद्ध है. दक्षिण भारत तथा इसके अतिरिक्त उत्तर भारत, बंगाल में भी विजयदशमी पर्व को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है.

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