
आज से 76 साल पहले पाकिस्तान के पहले पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली की हत्या कर दी गई थी. लियाकत अली ने आजादी और विभाजन के दौरान हिंदू-मुसलमान संबंधों को लेकर अहम भूमिका निभाई थी. लियाकत अली का जन्म पंजाब के करनाल में हुआ था, जो आज हरियाणा का हिस्सा है. बाद में इनके परिवार को यूपी के मुजफ्परनगर इलाके में बड़ी जागीर मिली. कुछ सालों पहले उनकी मुजफ्फरनगर वाली संपत्ति को लेकर काफी विवाद हुआ था. कुछ लोगों ने इस पर अपना अधिकार जताया था. बताया जाता है उस दौरान उन्हें काफी काफी संपत्ति मिली थी.
जिन्ना के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के सबसे बड़े नेता थे. जब अंतरिम सरकार का गठन हुआ तो मुस्लिम लीग ने उन्हें अपने नुमाइंदे के रूप में भेजा. उन्हें पंडित नेहरू ने वित्त मंत्रालय सौंपा था. पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने साल 2 फरवरी 1946 में भारत का बजट पेश किया था और वो इसके डेढ़ साल बाद प्रधानमंत्री बने थे. लियाकत अली भारत के पहले वित्त मंत्री थे. 1950 में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच आठ अप्रैल 1950 को एक समझौता किया था, जिसका खास मकसद दोनों देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित करना और भविष्य में युद्ध की संभावनाओं को खत्म करना था.
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उस वक्त कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू और लियाकत अली के बीच हुए समझौते को लेकर 6 अप्रैल 1950 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और जनसंघ की स्थापना की. बता दें कि जनसंघ ने ही बाद में बीजेपी का रुप लिया. उसके बाद 14 अगस्त 1951 को लियाकत अली पाकिस्तान के पीएम बने और अपनी हत्या के दिन 16 अक्टूबर, 1951 तक पद पर बने रहे थे. उनकी हत्या तब पाकिस्तान की राजधानी रावलपिंडी के कंपनी बाग में ठीक उसी स्थान पर की गई थी, जहां 2007 में बेनजीर भुट्टो को गोली मारी गई थी.