
सरकार की तरफ से एक संसदीय पैनल को बताया गया कि भारतीय सेना ने पहले नियंत्रण रेखा के पार जो आतंकवादी विरोधी अभियान चलाए थे, वो एक खास टारगेट वाले सीमित क्षमता के अभियान थे. लेकिन यह पहला मौका है, जब सरकार ने इसे रणनीति के तहत सार्वजनिक कर दिया.
सांसदों ने जयशंकर से पूछा- क्या पहले भी हुई थीं सर्जिकल स्ट्राइक?
विदेश सचिव एस जयशंकर ने विदेश मामलों से संबंधित संसदीय समिति को यह जानकारी मंगलवार को दी. सांसदों ने जयशंकर से सवाल पूछा था कि क्या पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी? बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, 'पहले एलओसी के पार विशिष्ट लक्ष्य वाले सीमित क्षमता के आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए गए थे, लेकिन यह पहला मौका है जब सरकार ने इसे सार्वजनिक किया है.'
सर्जिकल स्ट्राइक के बार भी भारत-पाक की बातचीत जारी
एस जयशंकर ये की टिप्पणी काफी अहम है क्योंकि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने पिछले हफ्ते कांग्रेस के दावों को खारिज कर दिया था कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी सर्जिकल स्ट्राइक की गई थीं. सदस्यों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि जयशंकर ने समिति से यह भी कहा कि 29 सितंबर के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी भारत पाकिस्तान से बातचीत कर रहा है लेकिन भविष्य की बातचीत तथा इसके स्तर के बारे में कोई कैलेंडर नहीं तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के समाप्त होने के बाद शीघ्र ही पाकिस्तानी सेना के सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) को हमलों के बारे में सूचित कर दिया गया था.
करीब ढाई घंटे चली बैठक के दौरान सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने भी नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक का ब्यौरा दिया.