
लखनऊ विधानपरिषद के सभापति के 24 साल के जवान बेटे की लखनऊ में उन्हीं के घर में देर रात मौत हो जाती है. सुबह-सुबह पुलिस घर पहुंचती है. पर मां पुलिस को ये कह कर भेज देती है कि बेटे को रात को दिल का दौरा पड़ा था जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई. मगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि मौत दिल का दौरा पड़ने से नहीं बल्कि गला घोंटने की वजह से हुई है. शक मां पर जाता. मां पकड़ी जाती है. कत्ल की बात भी कबूल कर लेती है. मगर फिर चंद घंटे के अंदर ही वो कहती है कि बेटे का कत्ल उसने नहीं बल्कि किसी और ने किया है. और यहीं से लखनऊ पुलिस की उलझन शुरू हो जाती है.
उसकी मां ने पहले कहा- अभिजीत के सीने में दर्द था. फिर कहा- अल्पआयु की भविष्यवाणी थी. इसके बाद कहा- मैंने ही अभिजीत को मारा. लेकिन कुछ घंटे बाद कहा- मेरे ऊपर झूठा आरोप लगाया गया. और फिर कह दिया कि अभिजीत को मारने की साज़िश हुई है.
लखनऊ से बाहर आई ये एक अजीब कहानी है. जो महिला पुलिस की गिरफ्त में आई है, वो कोई आम महिला नहीं हैं. बल्कि यूपी विधान परिषद के सभापति रमेश यादव की दूसरी पत्नी मीरा यादव हैं. पत्नी होने के साथ-साथ मीरा यादव नरेश यादव के दो जवान बेटों की मां भी हैं. उन्हीं दो बेटों में से 24 साल के एक बेटे अभिजीत की 20 अक्टूबर की रात अचानक रहस्यमयी हालत में मौत हो जाती है. मां कहती है कि बेटे के सीने में अचानक दर्द उठा और वो मर गया.
दरअसल, लखनऊ के दारूलशफा के बी-ब्लॉक के फ्लैट नंबर-137 से 21 अक्टूबर की सुबह-सुबह सबसे पहले यही खबर बाहर आई थी कि अभिजीत का दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. ख़बर पुलिस को भी मिली. अब चूंकि मामला विधानपरिषद के सभापति के बेटे की मौत का था, लिहाज़ा पुलिस भी घर पहुंच गई. मगर तब पुलिस को ये कह कर रवाना कर दिया गया कि अभिजीत की मौत कुदरती है. खुद मां दिल का दौरा पड़ने की गवाही दे रही थी.
अब मां खुद कह रही थी लिहाज़ा शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी. पुलिस के जाने के बाद अभिजीत की अर्थी तैयार की गई और शव यात्रा श्मशान के लिए निकल पड़ी. मगर अंतिम संस्कार हो पाता उससे पहले अचानक एक बार फिर पुलिस पहुंच जाती है. इस बार पुलिस किसी की नहीं सुनती और अर्थी अपने कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज देती है.
इसके बाद इधऱ पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई उधर सारी कहानी बदल गई. पता चला कि अभिजीत की मौत सीने में तेज दर्द या दिल का दौरा पड़ने से नहीं बल्कि गला घोंटे जाने की वजह से हुई है. यानी उसका कत्ल किया गया है. तो फिर मां ने झूठ क्यों बोला? बस इसी सवाल ने पुलिस को मौका दे दिया अभिजीत की मां को गिरफ्तार करने का.
इधर, अभिजीत की मां पुलिस के शिकंजे में आती है और फौरन दूसरी कहानी सनाती है. इस बार कहती है कि उसी ने अपने बेटे अभिजीत को चुन्नी से गला घोंट कर मार दिया. क्योंकि अभिजित रात नशे में घर लौटा था और उसने उसके साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी.
मां के इकबाल-ए-जुर्म के बाद लखनऊ पुलिस ने भी चैन की सांल कि चलो एक हाई प्रोफाइल मर्डर केस जल्दी सुलझ गया. मगर अब मीरा यादव को पुलिस अदालत लेकर पहुंचती है तो मीरा फौरन फिर नई कहानी सुनाती है. और साथ में ये भी कहती है कि उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है.
फकत 24 घंटे के अंदर विधान परिषद के सभापति रमेश यादव की दूसरी पत्नी मीरा यादव 5 बार बयान बदल चुकी थी. मगर ये समझ से परे था कि जिसने पहली पुलिस पूछताछ में अभिजीत को मारने की बात को कबूल लिया था वो अचानक इस मौत के पीछे अब साज़िश की बात क्यों कह रही है?
जैसे जैसे वक्त गुज़रता जा रहा है वैसे वैसे ये मर्डर केस अब सचमुच मिस्ट्री बनता जा रहा है. पहले कहा गया कि जिस वक्त दारूलशफा के बी-ब्लॉक के फ्लैट नंबर-137 में अभिजीत की हत्या हुई. उस वक्त घर में सिर्फ उसकी मां मीरा यादव मौजूद थी. जबकि बड़ा भाई अभिषेक घर में नहीं था. मगर अब कहा जा रहा है कि अभिषेक की मौत के वक्त बड़ा भाई अभिषेक भी घर में ही मौजूद था. लिहाज़ा पुलिस ने अब उसे भी पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है.
और तो और मीरा यादव ने अपने पति रमेश यादव पर साज़िशन उन्हें फंसाने का इल्ज़ाम भी लगा दिया है. हालांकि अभी तक तो पुलिस ये मानकर चल रही है कि अभिजीत की हत्या. मां मीरा यादव ने ही की है. लेकिन अब इस मामले में एक और एंगल आ गया है प्रॉपर्टी विवाद का.
दरअसल विधानपरिषद के सभापति रमेश यादव की दो पत्नियां हैं. पहली पत्नी यूपी के एटा में रहती हैं जिनकी एक बेटी और एक बेटा है. जबकि मीरा यादव रमेश यादव की दूसरी पत्नी हैं जो दारूलशफा के बी-ब्लॉक के फ्लैट नंबर-137 में अपने दो बेटों अभिषेक और अभिजीत के साथ रहती हैं. पुलिस अभी भी इस बात की जांच में जुटी है कि क्या हत्या के वक्त फ्लैट में कोई और भी मौजूद था या नहीं. वहीं इस मामले में विधानपरिषद के सभापति रमेश यादव कुछ भी बोलने को राज़ी नहीं है.