
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की मुख्यमंत्री कुर्सी पर छाया संकट दूर हो गया है. चुनाव आयोग ने विधायकों के द्वारा चुनी जाने वाली 9 विधान परिषद सीटों पर चुनाव का ऐलान कर दिया है. आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 9 सीटों पर अब 21 मई को चुनाव होगा, जिनमें से एक सीट पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे किस्मत आजमाएंगे.
महाराष्ट्र की 9 विधान परिषद सीटों के लिए राज्य के विधान सभा सदस्य (विधायक) वोट देंगे. ऐसे में राज्य के मौजूदा आंकड़ा देखें तो उद्धव ठाकरे सरकार को 170 विधायकों का समर्थन हैं, जिनमें शिवसेना के पास 56, एनसीपी के 54, कांग्रेस के 44 विधायक हैं. इसके अलावा उद्धव ठाकरे सरकार को सपा के 2 और 5 निर्दलीय सहित 16 अन्य विधायकों का समर्थन हासिल है.
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वहीं, बीजेपी के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास 115 विधायक हैं जबकि 2 AIMIM और एक मनसे के विधायक हैं. विधान परिषद की एक सीट के लिए तकरीबन 33 वोटों की जरूरत होगी. इस लिहाज से देखें तो 9 में से 6 सीटें सत्ता पक्ष के खाते में जाती हुई दिख रही हैं तो 3 सीटें विपक्ष को मिलने की संभावना है.
महाराष्ट्र में विधान परिषद की 78 सीटें
बता दें महाराष्ट्र में विधान परिषद सदस्य के लिए कुल 78 सीटें हैं, जिनमें से हर दो साल पर एक तिहाई सीट पर चुनाव होते हैं. कुल 78 सीटों में से 66 सीटों पर चुनाव होता है जबकि 12 सीटों के लिए राज्यपाल कोटे से मनोनीत किया जा सकता है. वहीं, विधान परिषद की चुनाव वाली 66 सीटों में से 30 सीटें विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुनी जाती हैं तो 22 सीटों पर स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के तहत चुने जाते हैं. इसमें ग्राम प्रधान, बीडीसी, नगर पंचायत सदस्य-अध्यक्ष और ऐसे ही तमाम नगर पालिकाएं और नगर निगम के सदस्य वोट देते हैं.
इसके अलावा 7 सीटें स्नातक निर्वाचन और 7 सीटें शिक्षक कोटे के तहत चुने जाती हैं. इनमें राज्य के सात डिविजन मुंबई, अमरावती, नासिक, औरंगाबाद, कोंकण, नागपुर और पुणे डिविजन से एक-एक सीट होती है. यहां स्नातक वाली सीटों पर स्नातक किए या उससे ज्यादा शिक्षा प्राप्त करने वाले वोट करते हैं तो शिक्षक कोटे से चुनी जाने वाली सीटों पर माध्यमिक शिक्षक वोट देते हैं.
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महाराष्ट्र में राज्यपाल कोटे से मनोनीत होने वाली सीटों पर राज्य सरकार नाम के लिए प्रस्ताव भेजती है, जिस पर राज्यपाल सहमति देते हैं. हालांकि, गवर्नर कोटे से एमएलसी मनोनीत करने के लिए कुछ योग्यताएं होनी जरूरी हैं. इनमें साहित्य, विज्ञान, कला या कोऑपरेटिव आंदोलन और समाज सेवा का काम करने वाले विशिष्ट लोगों को ही चुना जाता है. महाराष्ट्र सरकार ने इसी कोटे की एमएलसी सीट के लिए उद्धव ठाकरे के नाम को राज्यपाल के पास भेजा था, जिस पर गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी ने कोई फैसला नहीं लिया है.
उद्धव अभी विधानमंडल के सदस्य नहीं
बता दें कि उद्धव ठाकरे फिलहाल महाराष्ट्र विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. 28 नवंबर 2019 को उन्होंने सीएम की शपथ ली थी. 28 मई को 6 महीने पूरे हो रहे हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे को 28 मई से पहले विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य होना जरूरी है, नहीं तो उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ेगी.
राज्यपाल द्वारा एमएलसी की मनोनीत सीट पर फैसला नहीं लेने के कारण उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी से गुहार लगाई थी. इसके बाद उन्होंने हस्ताक्षेप करने की बात कही. गुरुवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने 24 अप्रैल को रिक्त हुई 9 विधान परिषद की सीटों पर चुनाव करान की सिफारिश की थी.