
एआईआईबी, एशियाई विकास बैंक ने भारत के बिजली क्षेत्र के लिये 10 करोड़ डालर कर्ज की मंजूरी दे दी है. चीन की अगुवाई वाले एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक एआईआईबी ने भारत को बिजली पारेषण नेटवर्क को मजबूत बनाने, सौर तथा पवन र्जा के उपयोग को बढ़ाने के लिये एशियाई विकास बैंक के साथ मिलकर 10 करोड़ डालर (लगभग 650 करोड़ रुपये) के कर्ज की मंजूरी दी है.
सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार बीजिंग स्थित एआईआईबी के निदेशक मंडल ने कर्ज की मंजूरी दी है. इसमें एशियाई विकास बैंक एडीबी की तरफ से 5 करोड़ डालर का कर्ज शामिल है. भारत एआईआईबी का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है.
बैंक की अधिकृत पूंजी 100 अरब डालर है. चीन बैंक में 26.06 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरधारक है. वहीं भारत की हिस्सेदारी 7.5 फीसदी है. उसके बाद क्रमश: रूस 5.93 फीसदी तथा जर्मनी 4.5 फीसदी हिस्सेदारी है.
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गौरतलब है कि चीन के बैंकों द्वारा स्वीकृत किया गया यह कर्ज आंध्र प्रदेश राज्य में सब के लिए बिजली कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा. हालांकि आंध्रप्रदेश के इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार को पहले ही वर्ल्ड बैंक से कर्ज मिल रहा है. चीन के नेतृत्व वाले इन बैंकों का मानना है कि इस कर्ज की मंजूरी के साथ उनके लिए दूसरे राज्यों और अन्य देशों में सब के लिए बिजली जैसी योजना को फाइनेंस करने का रास्ता साफ हो सकता है.
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देश में चौबीस घंटे और हर घर बिजली देने के लिए मोदी सरकार की नई योजना सौभाग्य 'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना' तैयार है. 25 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा करते हुए कहा कि यह नई योजना सुनिश्चित करेगी कि दिसंबर 2018 तक सभी घर बिजली से रौशन हों.
लगभग 15 महीने तक चलने वाली इस योजना के तहत केन्द्र सरकार 16,320 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसमें लगभग 14,000 करोड़ रुपये ग्रामीण इलाकों में घरों को बिजली नेटवर्क से जोड़ने के लिए खर्च किए जाएंगे. वहीं लगभग 2,300 करोड़ रुपये शहरी इलाकों में इस काम को करने के लिए खर्च होंगे.