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खुलासाः 3 हजार सिमकार्ड और सिम बॉक्स की मदद से भारत में चला रहे थे ISI नेटवर्क

मध्य प्रदेश एटीएस ने गिरफ्त में आए आईएसआई संदिग्धों के पास से 50 मोबाइल फोन, 3 हजार सिम कार्ड और 35 सिम बॉक्स बरामद किए हैं. साथ ही आरोपियों ने फर्जी नाम-पतों पर दर्जनों बैंक अकाउंट्स भी खुलवाए थे, जिनमें से कुछ अकाउंट्स में पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा रकम भेजी जाती थी. मध्य प्रदेश में पहली बार इतने बढ़े स्तर पर चल रहे आईएसआई नेटवर्क का खुलासा हुआ है.

भोापाल में तैयार किया था आईएसआई नेटवर्क भोापाल में तैयार किया था आईएसआई नेटवर्क
राहुल सिंह
  • भोपाल,
  • 10 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 9:01 AM IST

मध्य प्रदेश एटीएस ने गिरफ्त में आए आईएसआई संदिग्धों के पास से 50 मोबाइल फोन, 3 हजार सिम कार्ड और 35 सिम बॉक्स बरामद किए हैं. साथ ही आरोपियों ने फर्जी नाम-पतों पर दर्जनों बैंक अकाउंट्स भी खुलवाए थे, जिनमें से कुछ अकाउंट्स में पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा रकम भेजी जाती थी. मध्य प्रदेश में पहली बार इतने बढ़े स्तर पर चल रहे आईएसआई नेटवर्क का खुलासा हुआ है.

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मध्य प्रदेश एटीएस ने गुरुवार को ग्वालियर से 5, भोपाल से 3 जबलपुर से 2 और सतना से 1 आईएसआई संदिग्ध को गिरफ्तार किया था. इन लोगों पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप है. आरोपियों ने स्वीकार किया कि मध्य प्रदेश से इन्हें सेना से जुड़ी तमाम जानकारियां और मदद मिला करती थी.

पाकिस्तानी हैंडलर्स ज्यादातर सतना के रहने वाले बलराम के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किया करते थे. एटीएस आईजी संजीव शमी ने बताया कि पिछले साल नवंबर में जम्मू-कश्मीर के आरएसपुरा से सतविंदर सिंह और दादू नामक दो आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी. सतविंदर आईएसआई के लिए सैन्य जानकारी जुटाने का काम करता था.

एटीएस ने खुलासा किया कि गिरोह का मास्टर माइंड गुलशन सेन दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर का टीचर है. गुलशन फिलहाल लखनऊ जेल में बंद है. एटीएस आईजी ने बताया कि एमपी के अलावा महाराष्ट्र, ओडिशा, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और यूपी में अपना नेटवर्क स्थापित करने के लिए गुलशन ने करीब एक हजार सिम बॉक्स किराए पर दिए थे.

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मिलिट्री इंटेलीजेंस की निशानदेही पर पकड़ा गया था मास्टर माइंड
गौरतलब है कि यूपी एटीएस ने गुलशन को मिलिट्री इंटेलीजेंस की निशानदेही पर पकड़ा था. गुलशन की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ. आईजी शमी ने बताया कि गुलशन सेन पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और वह दो बार अफगानिस्तान जा चुका है. गुलशन 5 साल तक अफगानिस्तान में रहा है.

अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के लिए कर चुका है काम
दरअसल वह अफगानिस्तान में तैनात एक अमेरिकी सेना के लिए बतौर आईटी कम्युनिकेशन सपोर्ट का काम करता था. जहां उसने समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज बनाने का हुनर सीखा था. उसकी नियुक्ति इंटरनेट के जरिए अमेरिका की एक प्राइवेट कंपनी के माध्यम से हुई थी. इसी हुनर के सहारे उसने भारत में जासूसी का इतना बड़ा नेटवर्क स्थापित कर लिया था.

पैरलल टेलीफोन एक्सचेंज की मदद से जुटाते थे खुफिया जानकारी
खुलासा हुआ है कि गिरफ्त में आए आरोपी बलराम ने भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में अपने साथियों के साथ मिलकर पैरलल टेलीफोन एक्सचेंज बनाया था. आरोपी इनके माध्यम से पाकिस्तान से आने वाली इंटरनेट फोन कॉल को लोकल नंबरों पर डायवर्ट कर दिया करते थे. ये कॉल इस्लामाबाद, कराची, रावलपिंडी से हांगकांग जाते थे.

इंटरनेशनल वॉयस कॉल के रूट एक्सचेंज के बाद लोकल नंबर देता था दिखाई
हांगकांग से इन इंटरनेशनल इंटरनेट कॉल्स को दिल्ली भेजा जाता था. दिल्ली से इन कॉल्स को जम्प करवाकर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सतना उनके एजेंटों को भेजा जाता था. यहां सिम बॉक्स और रिसीवर से इसे लोकल कॉल में बदलकर आगे ट्रांसफर किया जाता था. इंटरनेशनल वॉयस कॉल का रूट बदलकर लोकल नंबर पर कर दिया जाता था.

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कर्नल विक्रम तिवारी बनकर पूछ रहे थे सेना का मूवमेंट
दरअसल इस तकनीक से यह पहचान करना भी मुश्किल होता था कि फोन किसने किया है. इन पैरलल एक्सचेंज के जरिए कर्नल विक्रम तिवारी बनकर सेना से उनका मूवमेंट पूछा जा रहा था. एटीएस को शक है कि भोपाल में गैरकानूनी तौर पर चलाए जा रहे टेलीफोन एक्सचेंज के संचालन में कुछ इंजीनियरिंग छात्रों का भी हाथ हो सकता है. फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है.

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